नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। राज्य सभा ने बुधवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कर दिया जिसे पिछले साल ही लोक सभा ने पारित कर दिया था। व्यापार और उत्पादन उद्योग ने जीएसटी संविधानिक संशोधन बिल का स्वागत किया है।
वर्तमान में, केन्द्र सरकार (सेन्ट्रल वैट या एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, अंतर्राज्यीय बिक्री पर सेन्ट्रल सेल्स टैक्स, आदि) और राज्यों (बिक्री पर वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स और ऑक्ट्राई और नगरपालिकाओं द्वारा लगाए गए प्रवेश कर) द्वारा कई प्रकार के कर लगाए गए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद इन विभिन्न प्रकार के करों को जीएसटी में ही समाहित कर दिया जाएगा और देश भर में एक कर एक व्यवस्था लागू होगी।
कंपनी सचिव और लेक्सकॉम्प्लाई.कॉम के संस्थापक गौरव जैन, “जीएसटी मूल्य प्रदान करने वाले वैश्विक अभ्यासों से सममूल्य होने के प्रति एक प्रभावी कदम है और इससे संबंधित अनुपालन को भी उचित रखा गया है। यह प्रणाली वर्तमान के उत्पादन-आधारित कराधान से उपभोक्ता-आधार में बदल जाएगी। सभी राज्यों में करों में एकरूपता को आकार देने के साथ ही, इस प्रणाली में दक्षता और अनुपालन बढ़ाने की उम्मीद भी इससे की जाती है।”
केएनजी एग्रो फूड के निदेशक सिद्धार्थ गोयल ने कहा, “जब उत्पादों और सेवाओं को एक पैकेज के रूप में बेचा जाता है तो उनके बीच एक अंतर होता है। कंपनियों को उत्पाद/सेवा के पूरे बुनियादी मूल्य पर कर का भुगतान करना पड़ता है, जीएसटी के कार्यान्वयन के साथ, एक श्रंखला में कंपनियों को केवल मूल्यवर्धन पर ही कर का भुगतान करना पड़ेगा। तो, भुगतान किये गये वास्तविक कर के कम होने और कर भुगतान से बचने के प्रलोभन को भी कम करने की उम्मीद होगी।”
अनुपम सिंक्स के निदेशक राजेन्द्र गर्ग ने कहा, “पिछले कुछ सालों में टैक्स डिजाइन और प्रशासन में किए गए सुधारों के बावजूद, केन्द्रीय और राज्य दोनों ही स्तरों में यह प्रणाली काफी जटिल है। ये विवादों और अदालत की चुनौतियों के विषय हैं, और विवादों को हल करने की प्रक्रिया धीमी और महंगी है। उसके साथ-साथ, इस अर्थव्यवस्था के बेहद व्यवस्थित क्षेत्रों को छोड़कर, यह प्रणाली ठोस अनुपालन अंतरों का भी कष्ट झेलती है। इसलिए एक मजबूत सिंगल कराधान प्रणाली जीएसटी बहुप्रतीक्षित है, जिसमें विभिन्न केन्द्रीय और राज्य कानूनों को सम्मिलित करके एक कर दिया जाएगा।”
प्रणय इम्पेक्स प्रा. लि. के निदेशक प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, “करों से बचने के लिए, उत्पादों को ज्यादातर राज्य के अंदर ही बेचा जा रहा है ताकि सीएसटी का भुगतान करने से बचा जा सके जो कि उत्पादन के स्तर पर या व्यापार के दौरान नहीं लगाया जाता है। देश के एक भाग में बनाए जा रहे अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद को दूसरे के सुदूर कोन में ज्यादा अच्छा बाजार मिलेगा क्योंकि कोई सीएसटी या प्रवेश कर नहीं होगा। जीएसटी बिल का कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप निश्चित तौर पर एक संगठित बाजार का निर्माण होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों में उत्पादों का समेकित संचार होगा और व्यापार की लेन-देन लागत भी घटेगी।”
उद्यमी व निवेशक (बिग वास्केट, ब्लूस्टोन, फ्रेसमेनू, हाऊसज्वाय आदि के साझीदार) के गणेश ने बताया, “जीएसटी बिल का राज्यसभा में पारित होना एक प्रगतिशील कदम है। क्योंकि इससे ईकॉमर्स क्षेत्र का विकास होगा और राज्यों की सीमाओं के पार माल की निर्बाध आवाजाही की सुविधा मिलेगी। हालांकि हर विनियमन की तरह इसे भी सही ढंग से लागू करने की जरूरत है। इसे प्रशासनिक बाधाओं के बोझ तले दबे ईकामर्स कंपनियों के लिए और जटिल नहीं बनाना चाहिए।”
जीएसटी के फायदों के बारे में इंटेक्स टेक्नोलॉजिज (इंडिया) लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक नरेन्द्र बंसल का कहना है, “अंतत:, भारत ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया, जो देश के भीतर लगभग 30 अलग-अलग बाजारों की विरासत को संजोये हुए था। हम पर लगभग 25-30 प्रतिशत और कुछ क्षेत्रों में तो इससे भी अधिक कई अलग-अलग राज्य-स्तरीय कर एवं शुल्क लाद दिये गये थे। जीएसटी से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अंततोगत्वा भारत एक सामान्य बाजार के रूप में उभर सके, जहां कर की दर लगभग 18 प्रतिशत होगी और दोहरा करारोपण नहीं होगा एवं अनेक शुल्कों के सोपानी प्रभाव से मुक्ति मिल सकेगी।”
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