नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में नीट के दूसरे चरण का पेपर कथित तौर पर लीक होने के मामले की जांच पर विस्तृत रपट राज्य पुलिस से मंगाने की एक याचिका मंगलवार को नामंजूर कर दी।
न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति नागेश्वर राव की सदस्यता वाली पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा, “हम निगरानी नहीं करना चाहते। हमने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से खुला दिमाग रखने और पुलिस जांच में उभरे तथ्यों को ध्यान में रखने को कहा है।”
याचिका नीट द्वितीय में शामिल हुए एक छात्र ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से उत्तराखंड पुलिस की स्थिति रपट में पेपर लीक के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर सीबीएसई को परीक्षा दोबारा कराने का निर्देश देने की मांग भी की है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए कि अदालत ‘को मामलों से लादा नहीं जा सकता’ याचिकाकर्ता से कहा कि अगर जांच में लीक साबित होने का कोई तथ्य सामने आता है तो वह उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जा सकते हैं।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि 24 जुलाई को भी जब कथित लीक की खबर आई थी, सीबीएसई के पूरे बोर्ड ने राज्य पुलिस द्वारा भेजे गए पेपरों की जांच की थी और उसमें पाया गया था कि उनका नीट के दूसरे चरण के पेपर से कोई लेना-देना नहीं था।
इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा सीबीएसई को भेजी गई सारी सामग्री की पूर्व प्रधान न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता वाली ‘ओवरसाइट कमेटी’ ने जांच की थी और उन्हें भी उसमें कोई धोखाधड़ी नहीं नजर आई।
याचिका की सुनवाई के आरम्भ में, सीबीएसई के वकील ने अदालत को बताया कि 24 जुलाई की सुबह उत्तराखंड पुलिस ने जैसे ही उन्हें कुछ लड़कों से कुछ पेपर्स बरामद किए जाने के बारे में सूचित किया, उसने पुलिस को ईमेल के जरिए बरामद पेपर्स भेजने को कहा था।
सीबीएसई के वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड के सभी सदस्यों द्वारा बरामद पेपर्स की जांच के बाद पाया गया कि उसमें से कोई एक प्रश्न भी उस प्रश्न पत्र में से नहीं था जो बोर्ड ने नीट के दूसरे चरण की परीक्षा में छात्रों को दिया था।
पीठ को बताया गया कि सारी सामग्री न्यायाधीश लोढ़ा समिति के समक्ष रखी गई थी। समिति ने भी उसकी जांच के बाद क्लीन चिट दे दी थी और बोर्ड को उस मामले में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने को कहा था।
सीबीएसई की प्रतिक्रिया को ‘मानक रक्षा’ बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ को बताया कि राज्य पुलिस ने सीबीएसई को ‘थोड़ी-सी सामग्री’ भेजी थी और सीबीएसई ने उसी आधार पर अपनी आंखें मूंद ली।
dharmpath.com dharmpath