रायपुर, 9 अगस्त (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नक्सलियों से हिंसा छोड़ने और शांतिपूर्ण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि यदि वे ऐसा करते हैं तो छत्तीसगढ़ सरकार उन्हें गले लगाने को तैयार रहेगी।
रायपुर, 9 अगस्त (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नक्सलियों से हिंसा छोड़ने और शांतिपूर्ण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि यदि वे ऐसा करते हैं तो छत्तीसगढ़ सरकार उन्हें गले लगाने को तैयार रहेगी।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासियों के विशाल सम्मेलन और अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी कोशिश है कि बस्तर में एक बार फिर ढोल और मांदर की थाप गूंजे। बस्तर अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।”
उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएसी) और राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए बस्तर और सरगुजा में विशेष कोचिंग केंद्र खोलने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इन कोचिंग केंद्रों में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के युवाओं को कोचिंग दी जाएगी।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर इस विशाल सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने की। कुलस्ते ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार सराहनीय प्रयास कर रही है।
इस मौके पर प्रदेश के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, वन मंत्री महेश गागड़ा तथा स्कूल शिक्षा एवं आदिम जाति तथा जनजाति विकास मंत्री केदार कश्यप, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष जी. आर. राणा, राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य मोहन मंडावी ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने लोगों को राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समाज के कल्याण और विकास के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम में पर्यटन और संस्कृति मंत्री दयालदास बघेल, श्रम मंत्री भइयालाल राजवाड़े, संसदीय सचिव तोखन साहू, सुनीति सत्यानंद राठिया, छत्तीसगढ़ अंत्यावसायी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष निर्मल सिन्हा भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह, भूमकाल के जननायक गुंडाधूर, जननायक बिरसा मुंडा, वीरांगना रानी दुर्गावती तथा भूमिया राजा शहीद गेंद सिंह सहित उन सभी महापुरुषों की शहादत को नमन किया, जिन्होंने देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति दी।
डॉ. सिंह ने कहा, “भारत के इन सपूतों के बलिदान की बदौलत ही आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। रामदयाल मुंडा के अथक प्रयास से 9 अगस्त से विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरुआत हुई है और आज न केवल भारत में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे मनाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा के बच्चों में भी प्रतिभा की कोई कमी नही है, बस कमी थी तो अवसर की जिसे हमने प्रयास विद्यालय के माध्यम से प्रदान किया और यहां के बच्चों ने आईआईटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग में चयनित होकर इसे साबित कर दिखा दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ ही संपूर्ण विकास के क्षेत्र विशेष रूप से कार्य किए जा रहे हैं, जिससे वे विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ सके।
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