बालकोनगर (छत्तीसगढ़), 12 अगस्त (आईएएनएस)। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) बालको की स्मेल्टर, विद्युत परियोजना एवं शीट रोलिंग शॉप समेत समस्त इकाइयांे का पूर्ण प्रचालन शुरू हो गया है। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक रमेश नायर ने शुक्रवार को 3.25 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता के नए स्मेल्टर के अंतिम पॉट का स्विच ऑन कर बालको को पूर्ण प्रचालन स्थिति में लाया। 1200 मेगावॉट की सभी इकाइयां पहले ही पूर्ण प्रचालन में आ चुकी हैं।
बालको के पूर्ण प्रचालन में आ जाने से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रतिवर्ष लगभग छह लाख टन एल्युमिनियम का उत्पादन होगा। बालको में बिजली का उत्पादन 2010 मेगावॉट तक पहुंच गया है।
बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण उत्पादन से लगभग एक वर्ष तक बाहर रहे शीट रोलिंग शॉप को फिर से शुरू किया गया है। यह संयंत्र अब धीरे-धीरे अपनी पूर्ण क्षमता की ओर अग्रसर है। शीट रोलिंग शॉप में कई प्रकार के फीनिस्ड प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं।
अंतिम पॉट के उद्घाटन समारोह में पूजा आयोजित हुई। नायर, बालको के एल्यूमिनियम व्यवसाय प्रमुख दीपक प्रसाद, सामुदायिक संबंध प्रमुख बी.के. श्रीवास्तव, पॉट रूम प्रमुख श्री आर.के. सिंह सहित अनेक बालको अधिकारी, कर्मचारी एवं ठेका कामगार कार्यक्रम में मौजूद थे।
नायर ने सभी के एकजुट प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि बालको विश्वस्तरीय मानदंडों का पालन करते हुए उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता, ग्राहक संतुष्टि आदि क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित करेगा।
वर्ष 2001 में बालको के विनिवेश के बाद स्टरलाइट और अब उसकी मातृ कंपनी वेदांत समूह ने लगभग 4,500 करोड़ रुपये के निवेश से 2.50 लाख टन के स्मेल्टर और 540 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र की नींव रखी। इससे बालको की उत्पादन क्षमता एक लाख टन से बढ़कर 3.50 लाख टन हो गई।
बालको का विस्तार यहीं नहीं रुका। वेदांत समूह ने छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की सकारात्मक औद्योगिक नीतियों से प्रेरित होकर बालको में 3.25 लाख टन के नए स्मेल्टर और 1200 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र के निर्माण पर लगभग 9000 हजार करोड़ रुपये और निवेश किए, जिसके सुखद परिणाम सामने हैं।
बालको की विस्तार परियोजनाओं से लगभग 15,000 लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार मिले हैं। संभावना है कि लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। बालको के पूर्ण प्रचालन में आने से छत्तीसगढ़ राज्य और केंद्र सरकार को बड़ा राजस्व मिलेगा।
देश के एल्युमिनियम उत्पादन में बालको का योगदान लगभग 15 फीसदी का है। पिछले एक दशक में वेदांत समूह ने बालको से अर्जित लाभ का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक विकास कार्यों में वापस निवेश किया है। 10 वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार को बालको से लगभग 1000 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, वहीं 2800 करोड़ के व्यावसायिक अवसर निर्मित हुए।
आधी शताब्दी के दौरान बालको ने देश की सामान्य जरूरतों के लिए धातु की आपूर्ति तो सुनिश्चित की ही, वैज्ञानिक एवं रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थित दर्ज कराई। देश में निर्मित लंबी दूरी तक मार करने वाली अनेक मिसाइलों में बालको के एल्युमिनियम का प्रयोग हुआ तो अंतरिक्ष संबंधी उपकरणों में बालको की कारीगरी मिसाल बनी।
बालको विनिवेश से पूर्व जहां केवल चार गांवों में सामुदायिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम संचालित थे, वहीं अब राज्य के 121 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास आदि कार्य किए जा रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास आदि पर निवेश लगभग 250 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच गया है। सामुदायिक विकास परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले नागरिकों की संख्या दो लाख के आसपास पहुंच गई है।
dharmpath.com dharmpath