असम पुलिस का बोडो युवकों के लिए कौशल विकास केंद्र खोलने का सुझाव

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बोडो युवाओं को उग्रवाद से दूर रखने के लिए असम पुलिस ने पूरे बोडोलैंड क्षेत्रीय जिला क्षेत्र (बीटीएडी) में कौशल विकास केंद्र खोलने का सुझाव दिया है। यह जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी।

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बोडो युवाओं को उग्रवाद से दूर रखने के लिए असम पुलिस ने पूरे बोडोलैंड क्षेत्रीय जिला क्षेत्र (बीटीएडी) में कौशल विकास केंद्र खोलने का सुझाव दिया है। यह जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी।

यह योजना अभी आरंभिक चरण में है। यह परिकल्पना असम पुलिस ने तब की जब हाल के महीनों में डेमोक्रेटिक फ्रंच आफ बोडोलैंड-एस (एनडीएफबी-एस) में युवाओं की भर्ती रोकने के लिए आतंरिक रूप से सुझाव मांगे गए थे।

असम के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई ने आईएएनएस से कहा, “एनडीएफबी में भर्ती रोकना आसान नहीं है। हम इन इलाकों के सुदूर गांवों के लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। चुनौतियां अनेक हैं।”

बिश्नोई ने कहा, “असम पुलिस की विशेष शखा के निवेदन पर मैंने बोडो इलाके में कौशल विकास केंद्र खोलने का सुझाव दिया है। इसके लिए 50 अलग-अलग गांव चिन्हित किए गए हैं। अगर यह सफल होता है तब हम संभवत: एनडीएफबी द्वारा युवाओं की भर्ती रोक सकते हैं।”

बिश्नोई रेलवे और बीटीएडी के भी प्रभारी हैं। उन्होंने कहा कि 50 गांवों की सूची पहले ही पुलिस विभाग को सौंपी जा चुकी है जो समुचित विश्लेषण के बाद सरकार के पास भेजी जाएगी।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कहा, “इन कौशल विकास केंद्रों के जरिए इन बीटीएडी इलाके के आदिवासी युवकों को कई प्रकार के रचनात्मक कार्यो में शामिल किया जा सकता है। अगर यह पहल सफल हो जाती है तो हमारे पास राज्य से ही कुशल श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे।”

बिश्नोई ने कहा, “योजना के मुताबिक, कई अन्य विधाओं के साथ युवकों को कंप्यूटर विज्ञान, हस्तशिल्प और पलंबर के काम के प्रशिक्षण दिए जाएंगे।”

असम पुलिस के प्रमुख मुकेश सहाय ने कहा था कि उग्रवाद विरोधी अभियानों के कारण एनडीएफबी को भारी नुकसान हुआ है। क्षति की भरपाई के लिए वे व्यग्रता के साथ 18 से कम उम्र के लड़कों की भर्ती कर रहे हैं।

सहाय ने कहा, “यह चिंता की बात है कि स्कूल जाने वाले छात्र भी उग्रवादी संगठनों में भर्ती किए जा रहे हैं जो गरीबी समेत अनेक कारणों से प्रभावित हो जाते हैं।”

असम पुलिस के अनुसार, 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को भी जबरन उठाकर ले जाने के भी कई उदाहरण हैं।

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