जबलपुर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक दबंग मालगुजार ने एक महिला की शवयात्रा को अपनी जमीन से होकर नहीं गुजरने दिया। श्मशानघाट की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिए जाने पर शवयात्रा कमर भर पानी भरे तालाब से होकर गुजरी। यह दृश्य कई समाचार चैनलों पर दिखाया गया, लेकिन जिलाधिकारी ने इस घटनाक्रम को ‘क्रिएटेड सीन’ (बनावटी दृश्य) करार दिया है।
जबलपुर जिले की पनागर तहसील के बमनोद ग्राम पंचायत के बेहर गांव में झूमक पटेल की 70 वर्षीय पत्नी कांतिबाई पटेल का गुरुवार को देहांत हो गया था। जब उनकी अंतिम यात्रा श्मशानघाट की ओर बढ़ी तो पता चला कि श्मशानघाट तक जाने का रास्ता पानी भरा होने के कारण बंद हो गया है। जब शवयात्रा को सवर्ण वर्ग के एक दबंग नलिन शर्मा के खेत से होकर ले जाने की कोशिश की गई, तो उसने रोक दिया। आखिरकार शवयात्रा में शामिल लोगों को तालाब में कमर भर पानी से होकर गुजरना पड़ा। शवयात्रा में शामिल कई लोगों के तो गले तक पानी था।
तालाब से शवयात्रा गुरजने वाला दृश्य जब कई समाचार चैनलों पर दिखाया गया और मामला तूल पकड़ने लगा, तब जिलाधिकारी महेश चंद्र चौधरी ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि लोग खेतों की मेड़ से होकर श्मशानघाट जाते हैं, शवयात्रा को तालाब से होकर ले जाते जो दिखाया जा रहा है, वह ‘क्रिएटड सीन’ है।
चौधरी का कहना है कि अंत्येष्टि के लिए लकड़ी और कंडों (गोबर के उपलों) को खेत की मेड़ से होकर ले जाया गया, मगर शवयात्रा जनबूझकर तालाब के पानी से होकर निकाली गई। उन्होंने माना कि श्मशान घाट की ओर जाने वाले रास्ते में तीन से चार फुट तक बारिश का पानी भरा हुआ है, मगर श्मशानघाट तक जाने के और भी रास्ते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, श्मशानघाट की जमीन में धान रोप दिया गया था, इसलिए शोक संतप्त परिवार को आखिकार निजी जमीन पर बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
पनागर के विधायक सुशील तिवारी ने कहा कि बेहर गांव में श्मशानघाट जाने का रास्ता तीन दिन के भीतर बनवा दिया जाएगा।
ऐसी ही एक घटना पिछले दिनों मुरैना जिले में हुई थी। एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार घर के सामने सड़क के किनारे खाली स्थान पर करना पड़ा था, क्योंकि श्मशानघाट पर सवर्ण दबंगों का कब्जा था। उन लोगों ने दलित परिवार की महिला का अंतिम संस्कार श्मशानघाट पर नहीं करने दिया था।
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