स्कॉर्पीन लीक : पर्रिकर ने हल्का, पत्रकार ने गंभीर बताया (राउंडअप)

download (3)नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने शुक्रवार को दोहराया कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी से संबंधित दस्तावेजों के लीक होने से देश के सामरिक हित प्रभावित नहीं होंगे। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि यह चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है। जबकि मामले का खुलासा करने वाले आस्ट्रेलियाई पत्रकार ने कहा कि भारत सरकार इसे हल्का बताने की कोशिश कर रही है, जबकि यह गंभीर मामला है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने शुक्रवार को दोहराया कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी से संबंधित दस्तावेजों के लीक होने से देश के सामरिक हित प्रभावित नहीं होंगे। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि यह चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है। जबकि मामले का खुलासा करने वाले आस्ट्रेलियाई पत्रकार ने कहा कि भारत सरकार इसे हल्का बताने की कोशिश कर रही है, जबकि यह गंभीर मामला है।

भारतीय नौसेना के सूत्रों ने इस बीच कहा कि ‘द आस्ट्रेलियन’ अखबार ने अपनी वेबसाइट पर जो दस्तावेज डाले हैं, वे पुराने हैं।

पर्रिकर ने एक कार्यक्रम से अलग पत्रकारों से यहां कहा, “हम रपट का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल अखबर की वेबसाइट पर जो है, वह हमारे लिए चिंता की बात नहीं है, बल्कि हमें खुद लग रहा है कि यह लीक हुआ है और इसके लिए हम सभी एहतियात बरत रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि लीक दस्तावेजों में हथियारों से संबंधित जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि पहली कावेरी पनडुब्बी के परीक्षण जारी हैं, लिहाजा इसके संकेतकों को स्थापित किया जाना अभी बाकी है।

पर्रिकर ने कहा, “हम जो समझ रहे हैं, उसमें चिंता की बात इस कल्पना को लेकर है कि लीक होने का जो दावा किया गया है, और वाकई में लीक हुआ है।”

उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि इसमें चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि हम सभी चीजों को सही तरीके से व्यवस्थित कर लेंगे।”

यह पूछे जाने पर कि क्या इससे राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर असर पड़ेगा? पर्रिकर ने पलट कर सवाल किया, “आप फ्रांस की सभी चीजों का इस्तेमाल बंद कर देंगे? जाहिर तौर पर कंपनियां अलग-अलग हैं, उपकरण अलग है।”

इस बीच, आस्ट्रेलिया के खोजी पत्रकार कैमरन स्टीवर्ट ने आईएएनएस द्वारा पूछे गए सवालों का ईमेल के जरिए भेजे जवाब में कहा है कि भारतीय नौसेना मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है। स्टेवार्ट ‘द आस्ट्रेलियन’ में एसोसिएट एडिटर हैं।

स्टीवर्ट ने आईएएनएस से कहा, “नौसेना लीक के कारण हुई बदनामी को बचाने की कोशिश कर रही है, इसलिए वे इसे हल्का बता रहे हैं। यदि वे कहते हैं कि इससे कोई नुकसान नहीं है तो हम अब सभी 22,400 गोपनीय दस्तावेजों को नेट पर डाल सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “इस लीक को हल्का बताने की कोशिश में भारत और फ्रांस की अपनी स्वार्थी सोच के बावजूद यह एक बड़ा और गंभीर डेटा लीक है।”

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि लीक दस्तावेज भारत को दिए गए विवरणों के हिस्सा हैं।

सूत्रों ने इस बात से इंकार किया कि प्रकाशित दस्तावेजों का कोई नुकसानदायक असर है। उन्होंने कहा कि सबसे बुरी स्थिति में भी भारत नुकसान से निपटने में सक्षम है।

द आस्ट्रेलियन की वेवसाइट पर अपलोड कुछ दस्तावेजों पर भारतीय नौसेना के चिन्ह होने के बारे में पूछे जाने पर सूत्र ने कहा कि ये चिन्ह डीसीएनएस ने लगाए हैं, जिसने दस्तावेज तैयार किए हैं और यह एक सामान्य परंपरा है।

सूत्र ने कहा कि किसी भी संभावित नुकसान का पता करने के लिए सभी तरीके अपनाए जा रहे हैं और इस बारे में फ्रांस और आस्ट्रेलिया से बराबर संपर्क में हैं।

द आस्ट्रेलियन की रपट के अनुसार, डीसीएनएस से लीक 22,400 पृष्ठों की जानकारी डीसीएनएस द्वारा डिजाइन की गई स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी है।

अखबार ने दस्तावेजों में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारियों को संपादित कर हटा दिया है।

दस्तावेज और लीक के सूत्र के बारे में पूछे जाने पर स्टीवर्ट ने कहा कि ‘द आस्ट्रेलियन’ में प्रकाशित होने वाली उनकी अगली रपट में इस बारे में स्पष्टीकरण होगा। उन्होंने यह भी कहा कि लीक हुए अन्य दस्तावेजों को अपलोड करने की अखबार की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

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