कोलकाता, 4 सितंबर (आईएएनएस)। ट्वाय ट्रेन की सवारी कर मदर टेरेसा ने ईश्वरीय आज्ञा से दार्जिलिंग के गरीबों की सेवा की। दार्जिलिंग हिमालय रेलवे 70 साल बाद, उन्हें संत की उपाधि से दिए जाने पर उनकी इस यात्रा की याद को फिर से ताजा करेगा।
कहा जाता है कि 10 सितंबर, 1946 को ट्वाय ट्रेन से दार्जिलिंग यात्रा के दौरान मदर टेरेसा को ईश्वरीय आदेश मिला कि वह कान्वेंट छोड़कर मलिन बस्तियों में जाकर गरीबों की सेवा करें। इसी के बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना हुई।
मदर टेरेसा को मिल रही संत की उपाधि को चिह्न्ति करने के लिए दार्जिलिंग शाखा के ले मिशनरी ऑफ चेरटी की कोशिश है कि उनकी 1946 की दार्जिलिंग यात्रा की याद ताजा की जाए।
ले मिशनरी ऑफ चैरिटी के फादर पीटर लिंगदम ने कहा, “ट्वाय ट्रेन की यात्रा प्रतीक के तौर पर है। यह एहसास दिलाएगी कि मदर ने दार्जिलिंग आते समय कैसा अनुभव किया।”
दार्जिलिंग का मदर के जीवन में ऐतिहासिक महत्व रहा। उन्होंने भारत में लॉरेटो कान्वेंट पहाड़ी कस्बे में नन के रूप में अपने शुरुआती साल गुजारे। यहीं उन्होंने 1931 में अपनी नन के रूप में पहली प्रतिज्ञा भी ली।
यहां पर एक विशाल स्क्रीन पर मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने का सीधा प्रसारण होगा, साथ ही पहाड़ी गिरजाघरों विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
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