नई दिल्ली, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। टीवी के जरिए इस्लाम धर्म का प्रचार करने वाले जाकिर हुसैन की स्वयंसेवी संस्था, इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को विदेशी योगदान नियमन कानून(एफसीआरए) के तहत लाइसेंस जारी करने को लेकर निलंबित किए गए गृह मंत्रालय के चार अधिकारियों को एक पूर्व गृहसचिव का समर्थन मिला है।
पूर्व गृहसचिव जी.के. पिल्लै ने सीमा सुरक्षा पर आयोजित एक संगोष्ठी से अलग गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, “मुझे मामले की पूरी जानकारी तो नहीं है, लेकिन निलंबन की जरूरत नहीं थी।”
उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई की गई तो नौकरशाही कोई भी फैसला लेना बंद कर देगी।
पिल्लै ने स्वीकार किया कि जाकिर नाईक का मामला ऊंचे दर्जे का है, लेकिन उन्होंने कहा, “अपने अनुभव से मैं कह सकता हूं कि गृह सचिव को ऐसे मामलों में अपने अधिकारियों का बचाव करने की स्थिति में होना चाहिए।”
जाकिर नाईक के एनजीओ आईआरएफ के एफसीआरए लाइसेंस का नवीनीकरण करने में हुई गड़बड़ियों के कारण गृह मंत्रालय के चार अधिकारियों को एक सितंबर को निलंबित कर दिया गया।
नाईक का पीस टीवी और उसके भाषण केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में तब आए थे, जब एक जुलाई को ढाका में आतंकी हमला हुआ था, और हमले में शामिल रहे एक आतंकी ने स्वीकार किया था कि वह नाईक के भाषणों से प्रेरित हुआ था। हमले में विदेशी नागरिकों सहित 22 लोगों की मौत हो गई थी।
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