पटना, 10 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में सीवान के पूर्व सांसद और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की 11 साल बाद शनिवार की सुबह भागलपुर जेल से रिहाई को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार की शिथिलता का परिणाम बताया।
भाजपा ने बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि चर्चित तेजाब हत्याकांड मामले में न्यायालय के आदेश के बावजूद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू नहीं करके सरकार ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की रिहाई का रास्ता साफ किया, जिससे राज्य में खौफ का नया माहौल पैदा हुआ है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि शहाबुद्दीन जैसे व्यक्ति की रिहाई से राज्य में शांति-व्यवस्था का मामला कठघरे में आ गया है। उन्होंने पार्टी द्वारा 14 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर एक दिन का धरना देने की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी सरकार की चुप्पी का विरोध करेगी।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों के प्रति नरमी बरत रही है। भाजपा इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।
उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन की रिहाई से अपराधियों का मनोबल बढ़ा है। सवाल यह है कि जब मोकामा के विधायक अनंत सिंह पर सीसीए लग सकता है तो शहाबुद्दीन को इससे बाहर क्यों रखा गया?
जेल से छूटे शहाबुद्दीन ने जनता दल (युनाइटेड) अध्यक्ष नीतीश कुमार को ‘परिस्थितियों का नेता’ करार दिया है।
वहीं, राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने शहाबुद्दीन के बयान पर सहमति जताते हुए कहा, “यह जगजाहिर है कि लालू प्रसाद ही नेता हैं। नीतीश कुमार अपनी ताकत के नेता नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि किसी को नेता चुन लेने से ही वह नेता थोड़े बन जाता है!
जद (यू) ने शहाबुद्दीन के बयान पर पलटवार किया है। जद (यू) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने कहा कि नीतीश परिस्थितिजन्य नेता नहीं, बिहार की आवश्यकता हैं। राज्य के लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया है और वह सर्वमान्य नेता हैं।
उधर, बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन की रिहाई पर सधे अंदाज में कह कि न्यायपालिका ने अपना काम किया है, भाजपा इस मसले को जबरन तूल दे रही है।
उन्होंने कहा कि सुशील मोदी जैसे लोग अदालत के फैसले पर बोलकर न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं।
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