विशाखापत्तनम, 16 सितंबर (आईएएनएस)। भारत से समुद्री उत्पादों के निर्यात में 20 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है और 2016-17 में इसके 5.6 अरब डॉलर पहुंच जाने का लक्ष्य है। ऐसा विशेष रूप से जल कृषि विविधीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्य संवर्धन और उत्पादन की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के कारण संभव होगा। यहां अगले सप्ताह आयोजित होने वाले आगामी द्विवार्षिक इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो (आईआईएसएस) में इस सभी को यहां प्रदर्शित किया जाएगा।
वाणिज्य मंत्रालय के तहत कार्यरत व्यापक मत्स्य पालन क्षेत्र समन्वय एजेंसी, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) को उद्योग में पिछले वित्त वर्ष में हुई गिरावट के विपरीत इस वित्त वर्ष में वृद्धि होने की उम्मीद है। ज्ञातव्य है कि पिछले वित्त वर्ष में 4.7 अरब डॉलर मूल्य के कुल 945,892 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया गया था।
23 से 25 सितंबर तक आयोजित होने वाले एशिया में समुद्री भोजन पर सबसे पुराने और सबसे बड़े आयोजनों में से एक, आईआईएसएस 2016, घरेलू और निर्यात बाजार दोनों के लिए समुद्री खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, भारत में मत्स्य पालन संस्कृति का पालन करने वाले तकनीकीगत विकासों और जारी प्रथाओं को उजागर करने के लिए ‘सुरक्षित और सतत भारतीय एक्वाकल्चर’ पर केंद्रित होगा।
अमेरिका और दक्षिण पूर्व एशिया भारतीय समुद्री भोजन के प्रमुख आयातक हैं। पिछले साल फ्रोजन झींगांे का सबसे अधिक निर्यात किया गया, उसके बाद फ्रोजन मछलियों का निर्यात किया गया। इस साल भी फ्रोजन झींगों का सबसे अधिक निर्यात किए जाने की उम्मीद है।
एमपीईडीए के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक ने कहा, “एक्वाकल्चर समुद्री निर्यात के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इस क्षेत्र में भारी प्रौद्योगिकी निवेशों और उत्पाद विविधीकरण की दिशा में भारत सजग है और इस क्षेत्र में हमारे प्रयास अधिक से अधिक सक्षम साबित हो रहे हैं। व्हाइट लेग झिंगा और ब्लैक टाइगर झिंगा जैसे दुनिया में हमेशा मांग किए जाने वाले सदाबहार समुद्री खाद्य उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि और गरान केकड़ा और तिलापिया जैसी एक्वाकल्चर प्रजातियों के विविधीकरण के कारण इस साल निर्यात के लिए हमारा लक्ष्य अधिक होगा।”
विशाखापत्तनम में पोर्ट ट्रस्ट डायमंड जुबली स्टेडियम में भारतीय समुद्री भोजन निर्यातक संघ (एसईएआई) के साथ साझेदारी में एमपीईडीए के द्वारा आयोजित आईआईएसएस 2016, व्यापार संबंधित बातचीत के लिए एक प्रमुख मंच भी होगा। इससे भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए मार्ग प्रशस्त होने और ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
इस आयोजन में अमरीका, ब्रिटेन, स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड, स्वीडन, जापान, वियतनाम, नीदरलैंड, थाईलैंड, वियतनाम, ताइवान, जर्मनी और चीन जैसे देश भी भाग लेंगे।
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