कंपनी ने छत्तीसगढ़ शासन के उपक्रम सीएसआईडीसी (छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन) को इस बाबत पत्र भेजा है, जिसे राज्य शासन को भेज दिया गया है।
शासन के सामने अब समस्या यह है कि 1165 किसान जो जमीन देने को राजी हुए थे, उन्हें 42 करोड़ 7 लाख 44 हजार 561 रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है। चूंकि योजना विफल हो गई, इसलिए किसान अब अपनी जमीन भी मांग रहे हैं। ऐसे में शासन के सामने बड़े नुकसान की नौबत आ गई है।
सीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुनील मिश्रा ने कहा कि इस संबंध में निर्णय राज्य शासन को लेना है। टाटा स्टील लिमिटेड ने राज्य शासन के साथ जिले के लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में जून 2005 में लगभग बीस हजार करोड़ रुपये की लागत से साढ़े पचास लाख टन सालाना उत्पादन क्षमता का इस्पात संयंत्र लगाने के लिए एमओयू किया था।
राज्य शासन ने लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के दस गांवों की सरकारी, निजी और वन भूमि को मिलाकर 2043.450 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने ग्राम सभाएं आयोजित की थीं। इसमें 1707 किसानों की 1764.610 हेक्टेयर निजी जमीन भी शामिल है। प्रभावित किसानों में 1165 किसान मुआवजा प्राप्त कर जमीन देने को राजी हुए, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ा। वहीं 542 किसानों ने जमीन देने से साफ इनकार करते हुए मुआवजा राशि लेने से स्पष्ट मना कर दिया।
किसानों के लगातार विरोध के कारण शासन मुआवजा बांटने के बाद भी जमीन का अधिग्रहण का टाटा स्टील को उपलब्ध कराने में नाकाम रहा। शासन ने इस साल फरवरी में टाटा स्टील को बैलाडीला क्षेत्र में आवंटित लौह अयस्क की खान के लिए जारी प्रास्पेक्टिंग लाइसेंस भी निरस्त कर दिया था, तभी टाटा की बस्तर से विदाई तय हो गई थी।
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