नाईक ने शनिवार को नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (इंडिया) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विचारों में परिवर्तन होता है तो कृति में भी परिवर्तन होता है। मजबूरों में भी विश्वास जगाकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने शारीरिक रूप से अशक्त लोगों को ‘दिव्यांग’ कहा है।
नाईक ने कहा कि यदि ²ष्टिहीन स्वयं नेत्रदान की मुहिम चलाएंगे तो उसका समाज पर ज्यादा असर होगा। अभियान चलाकर नेत्रदान के लिये समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है। नेत्रदान से किसी दूसरे को नया जीवन मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि इस विचार से काम करें तो दिव्यांग भी हमारी ताकत बन जाएंगे और देश के लिए एक पूंजी साबित होंगे। मन में विश्वास हो तो आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के बाद ²ष्टिहीनों को पूंजी में परिवर्तित कर आगे बढ़ाने पर विचार करें।
पूर्व सांसद लालजी टंडन ने कहा कि देश बदल रहा है। शारीरिक कमी होने के कारण यह मानना कि वह व्यक्ति किसी से कम है, उचित नहीं है। भारत के इतिहास में दिव्यांगजनों का महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने सूरदास का उदाहरण देते हुए कहा कि सूरदास ने ऐसा साहित्य लिखा, जिसकी तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो दिव्यांग हैं, लेकिन समाज की सेवा कर रहे हैं।
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