नई दिल्ली, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने यहां की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आयोग की दो पूर्व अध्यक्षों- बरखा सिंह तथा किरण वालिया के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की।
छह पृष्ठों की शिकायत में मालीवाल ने कहा कि उन्हें ‘भारी वित्तीय अनियमितताओं तथा सरकारी अनुदानों के दुरुपयोग’ का पता चला है, जिसे बरखा सिंह और वालिया ने प्रथम दृष्टया दीक्षित के निर्देश पर 2007 से 2015 के बीच अंजाम दिया।
दीक्षित वर्ष 1998 से 2013 के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं।
मालीवाल खुद भी दिल्ली महिला आयोग में कथित भर्ती घोटाले को लेकर एसीबी की जांच का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन तीनों द्वारा की गई गड़बड़ियों की विस्तृत जानकारी वाला 128 पृष्ठों का दस्तावेज एसीबी को सौंपा गया है।
मालीवाल ने एक बयान में कहा, “उन्होंने आयोग के अनुदानों का दुरुपयोग किया है और करोड़ों रुपये सिर्फ कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए खर्च किए।”
उन्होंने कहा, “सर्वाधिक दुखद यह है कि उन्होंने निर्भया नाम का दुरुपयोग किया। इस क्रम में कुछ निश्चित कंपनियों को लाभ देते हुए लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए गए।”
उनका आशय दिसंबर 2012 में राष्ट्रीय राजधानी में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई युवती से था, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आक्रोश देखा गया था।
मालीवाल ने कहा, “दीक्षित आयोग को पत्र लिखा करती थीं और कहा करती थीं ‘खास अनुदान खास कंपनी को दे दिया जाए।’ उनके कहने पर प्रक्रियाओं का पालन किए बगैर धन खास कंपनियों को दिए गए।”
मालीवाल ने कहा, “उन्होंने आत्मप्रशंसा में ऐसी पत्रिकाओं को विज्ञापन दिए, जिनके बारे में कोई नहीं जानता।”
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के 2015 में सत्ता में आने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनीं मालीवाल ने कहा कि आयोग ने इन सभी की जांच जिम्मेदारी के साथ की।
उन्होंने कहा, “पूरा एसीबी प्रकरण (अपने खिलाफ) शुरू होने के बाद हमने सभी फाइलों का अध्ययन किया और ये अनियमितताएं पाईं।”
उन्होंने कहा, “हमने पूरे साक्ष्य के साथ एसीबी में शिकायत दी है।” इसके साथ ही उन्होंने तीनों महिला नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेजने की अपील एसीबी से की।
उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को ‘निराधार’ बताया। मालीवाल ने कहा, “कोई सबूत नहीं है, कोई आपराधिक आरोप नहीं है, जबकि हमने 128 पृष्ठों का सबूत दिया है।”
यह पूछे जाने पर कि क्या वह बदले की कार्रवाई में ऐसा कर रही हैं, मालीवाल ने कहा कि आयोग की अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने इन फाइलों का अध्ययन नहीं किया था।
उन्होंने कहा, “जब मेरे खिलाफ शिकायत की गई तो मैंने प्रक्रियाओं को समझने के लिए इन फाइलों का अध्ययन शुरू किया।”
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