केंद्र सरकार से काजू उद्योग को बचाने का आह्वान

नई दिल्ली, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय काजू निर्यात संवर्धन परिषद (सेप्सी) ने काजू निर्यात में हुए चिंताजनक गिरावट में सुधार के लिए केंद्र सरकार को एक पांच सूत्री योजना सौंपी है। सेप्सी ने सरकार से काजू के आयात शुल्क की वापसी और निर्यात प्रोत्साहन में हुई कटौती को पुन:स्थापित करने जैसे कदम उठाने का अनुरोध किया है।

सेप्सी के अध्यक्ष पी. सुंदरम ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारामन से काजू उद्योग से संबंधित विशिष्ट मुद्दों की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें हल करने में सहयोग करने का अनुरोध किया है।

इसके अलावा, सेप्सी काजू क्षेत्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की अनुमति देने का एक आधिकारिक अनुरोध पहले ही प्रधानमंत्री को प्रस्तुत कर चुकी है।

भारत से काजू निर्यात में 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी निर्यात मात्रा अप्रैल-अगस्त 2016 में गिरकर 25,000 मीट्रिक टन हो गई, जबकि पूर्व वर्ष में इसी अवधि के दौरान यह 42,000 टन थी।

पी. सुंदरम ने कहा, “हाल में लागू किए गए आयात शुल्क और प्रोत्साहन की कमी के कारण उद्योग को भारी धक्का पहुंचा है और निर्यात में भारी गिरावट आई है। हालांकि वर्तमान व्यापार नीति कृषि आधारित, श्रम उन्मुख, महिला केंद्रित और निर्यात उन्मुख उद्योगों को प्राथमिकता देती है, लेकिन इन सभी श्रेणियों में आने वाले काजू उद्योग को वांक्षित लाभ से वंचित कर दिया गया है और निर्यात प्रोत्साहन में भारी कटौती की गई है।”

सेप्सी के द्वारा रेखांकित पांच सूत्री उपायों में आयात शुल्क को पूरी तरह से वापस लेने का अनुरोध किया गया है, जिसमें विशेष अतिरिक्त शुल्क और उपकर सहित 9.36 फीसदी जोड़ा गया है। इसके अलावा, निर्धारित मात्रा आवश्यकताओं पर छूट देने की भी मांग की गई है, जिस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग संघर्ष कर रहा है।

सेप्सी ने निर्यातकों को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सक्षम बनाने के लिए कच्चे नट्स की निर्बाध प्रोसेसिंग और साथ ही साथ गुणवत्तापूर्ण गरी के आंतरिक व्यापार के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया है।

सेप्सी के द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में केंद्र सरकार से काजू उद्योग के लिए विशेष आर्थिक पैकेजों का अनुरोध किया गया है, मुख्य रूप से काजू कारखानों को बैंकों से लिए गए ऋण को किश्तों में चुकाने के लिए समय देने पर बल दिया गया है।

सभी प्रक्रियागत औपचारिकताओं का पालन करने के बाद भी कई बंदरगाहों से अग्रिम प्राधिकार प्राप्त करने में कठिनाइयों और देरी का मुद्दा भी परिषद ने उठाया है।

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