अमिताभ ने दरअसल अपने खिलाफ 13 जुलाई, 2015 को शुरू की गई विभागीय जांच में उन्हें बिना स्पष्टीकरण का मौका दिए, जांच अधिकारी बनाए जाने के आदेश को विधिविरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के लखनऊ बेंच में याचिका दायर किया था। जिसपर कैट ने 27 जनवरी 2016 को राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था।
राज्य सरकार ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में चुनौती दी थी, जिसपर लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस सत्येंद्र सिंह चौहान और जस्टिस विजयलक्ष्मी की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को बलहीन पाते हुए कैट के आदेश को सही बताया।
राज्य सरकार की याचिका खारिज होने पर अब अमिताभ के खिलाफ 13 जुलाई 2015 को शुरू की गई विभागीय जांच में नए सिरे से जांच अधिकारी नियुक्त कर कार्यवाही होगी।
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