अहमदाबाद, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात में आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को आरक्षण देने को लेकर प्रदेश सरकार की मुहिम ने दम तोड़ दिया, क्योंकि अध्यादेश की अवधि सोमवार को समाप्त हो गई।
अध्यादेश के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले पर राज्य सरकार की अपील अभी भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, लेकिन सरकार ने अध्यादेश के नवीनीकरण के लिए राज्यपाल का रुख नहीं किया और इसे स्वत: खत्म हो जाने दिया।
उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने हालांकि कहा, “हम सामान्य वर्ग के लोगों को ईबीसी के तहत 10 फीसदी आरक्षण का लाभ देने को प्रतिबद्ध हैं। लेकिन हम ईबीसी अध्यादेश को कानून में नहीं बदल सके, जिसके कारण यह खत्म हो गया।”
इसके साथ ही ओबीसी के तहत आरक्षण पाने के लिए आंदोलन करने वाले पटेल समुदाय को तुष्ट करने का सरकार का बड़ा प्रयास नाकाम हो गया।
पटेल अनामत आंदोलन समिति ने इस अध्यादेश को शुरुआत में ही इसे लॉलीपॉप करार दिया था, जबकि विपक्षी कांग्रेस 20 फीसदी आरक्षण चाहती थी, हालांकि उसने कहा था कि संविधान के तहत आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं दिया जा सकता।
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