नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में शराबबंदी खत्म करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी। बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिवादियों- भारतीय मादक पेय कंपनियों के परिसंघ और अन्य को छह हफ्ते और बिहार सरकार को चार हफ्ते का समय दिया।
शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने बिहार सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई। बिहार सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि राज्य की सामाजिक स्थिति के मद्देनजर मद्य निषेध को चुना गया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 सप्ताह के बाद करने का निर्देश दिया।
कंपनियों के संघ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्त अभिषेक मनुसिंघवी ने खंडपीठ से पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक न लगाने का आग्रह किया, क्योंकि पूर्ण मद्य निषेध नीति वाली नया कानून राज्य में गत 2 अक्टूबर से लागू है।
सिंघवी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर के अपने फैसले में उस अधिसूचना को रद्द किया है, जिसके तहत शराब की बोतलबंदी, बिक्री और सेवन पर रोक लगाई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि नया कानून मद्य निषेध लागू करता है और इसे चुनौती नहीं दी गई है।
हालांकि दलीलों से असंतुष्ट खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को लागू करने पर रोक लगा दी, जिसने बिहार आबकारी अधिनियम,1915 की धारा 19(4) और राज्य में मद्यनिषेध की अधिसूचना को असंवैधानिक करार दिया था।
एक माह के भीतर पटना उच्च न्यायालय के आदेश को दूसरी बार सर्वोच्च न्यायालय ने गलत ठहराया है। पटना हाईकोर्ट ने इससे पहले राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी, जिसे नीतीश कुमार सरकार ने चुनौती दी और सर्वोच्च न्यायालय जमानत रद्द कर दी। बाहुबली शहाबुद्दीन को फिर जेल जाना पड़ा। समूचे बिहार, खासकर सीवान के लोगों ने राहत की सांस ली।
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