भोपाल, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा मंगलवार को हषरेल्लास के साथ मनाया गया, जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। इस मौके पर भव्य व आकर्षक झांकियों के साथ चल समारोह भी निकले। इसके साथ ही देवी-प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर भी दिन भर चलता रहा।
राजधानी के विभिन्न हिस्सों में राम राथ के साथ आकर्षक झांकियां निकलीं। इन चल समारोहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
विट्ठल मार्केट, टीटीनगर दशहरा मैदान, छोला मैदान व भेल क्षेत्र के अलावा बैरागढ़ जैसे स्थानों पर राम-रावण का ‘युद्ध’ हुआ और उसके बाद रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। पुतलों के दहन के साथ हुई आतिशबाजी से आकाश जगमगा उठा।
सीहोर जिले के बुदनी तहसील मुख्यालय पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। दशहरे की सार्थकता अपने दुर्विचारों और दुर्गुणों को पूरी तरह नष्ट करने में है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान ने उपस्थित जनसमूह को अपने अंदर के काम, क्रोध, मद, लोभ, अंहकार, गंदगी जैसी बुराइयों के अंत का संकल्प भी दिलाया, ताकि फिर कोई पचास लोगों की मौत वाला व्यापम घोटाला न हो, शहला मसूद की हत्या न दोहराई जाए।
मुख्यमंत्री ने रावण का दहन कर श्री राम का पूजन किया। रंगारंग आतिशबाजी तथा दलेर मेंहदी की संगीत संध्या भी हुई।
धार्मिक नगर उज्जैन में दशहरे के मौके पर महाकाल की सवारी निकली। इस सवारी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और महाकाल की सवारी पर जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर नगर के विभिन्न मार्गो से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचे, जहां शमी वृक्ष का जिलाधिकारी संकेत भोडवे ने पूजन किया, उसके बाद सवारी मंदिर को लौटी।
इसी तरह राज्य के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। चल समारोह निकले, रावण के पुतलों का दहन किया गया।
इससे पहले समारोहों के साथ देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम देर शाम तक जारी रहा। हर शहर और गांव की सड़क व गली से देवी प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु जलस्रोतों तक विसर्जन के लिए पहुंचे।
वैसे तो सोमवार की रात को नवमी के मौके पर ही विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान व हवन के बाद से ही दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया था, मगर मंगलवार की सुबह से देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के चल समारोहों में तेजी आई।
राजधानी के विभिन्न स्थानों पर स्थापित की गई प्रतिमाओं को श्रद्धालुओं की टोलियां विभिन्न मार्गो से होती हुई बड़े तालाब के प्रेमपुरा घाट पर लेकर पहुंची, जहां उनका विसर्जन किया गया।
इसी तरह राज्य के अन्य हिस्सों जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन आदि स्थानों पर देवी-प्रतिमाओं को श्रद्धालुओं ने गीत भजन और नाचते गाते हुए विदाई दी। कई स्थानों पर तो आलम यह था कि सड़कें अबीर-गुलाल से पट गई थीं। अपनी आराध्य को विदाई देते वक्त श्रद्धालु इतने भाव-विभोर हो गए कि उन्होंने होली तक खेल ली।
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