मुख्यमंत्री ने संभागीय मुख्यालय जगदलपुर स्थित लगभग 97 साल पुराने केंद्रीय जेल परिसर में दस करोड़ रुपये की लागत से पांच सौ कैदियों के रहने के लिए निर्मित अतिरिक्त बैरक और 80 बिस्तरों वाले अस्पताल का शुभारंभ किया।
यह जेल परिसर लगभग 97 साल पुराना है। इसका निर्माण वर्ष 1919 में किया गया था। समय-समय पर इसका उन्नयन भी होता रहा।
डॉ. रमन सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा, “मैं जेल में आने की शुभकामनाएं तो किसी को भी नहीं दूंगा, लेकिन जेलों को सुधारगृह के रूप में विकसित करने के सरकार के प्रयासों में सभी लोगों, विशेष रूप से जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से सहयोग की उम्मीद जरूर रखूंगा।”
उन्होंने कहा कि जगदलपुर जेल परिसर में नवीन ब्लॉक के निर्माण से कैदियों को काफी सहुलियत होगी। राज्य सरकार का यह मानना है कि कैदी भी सामान्य इंसानों की तरह हैं और किसी क्षणिक आवेश में अपराध की वजह से जेल की सजा काट रहे हैं। उन्हें भी सुधरने का अवसर और स्वच्छ वातावरण में रहने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए जेल परिसरों में शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश की जेलों में कैदियों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगारमूलक कौशल प्रशिक्षण दिलाने की भी योजना है, ताकि रिहाई के बाद वे भी आम नागरिकों की तरह आत्मनिर्भर बनकर समाज में स्वाभिमान के साथ जीवनयापन कर सके।”
डॉ. सिंह ने खुशी जताई कि जगदलपुर जेल में कैदियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेलों को सुधार गृह के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने इस अवसर पर मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत कम्प्यूटर हार्डवेयर प्रशिक्षण प्राप्त बंदी गिरधर साहू, टेलर प्रशिक्षण प्राप्त बंदी नीलाधर और श्रीनिवास राव, बढ़ई प्रशिक्षण प्राप्त बंदी संतीश कुमार जुमड़े और प्रिटिंग प्रशिक्षण प्राप्त बंदी सुशांत माली को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
डॉ. सिंह ने परिसर में कैदियों द्वारा जेल में निर्मित विभिन्न वस्तुओं की प्रदर्शनी को भी देखा और उनके हाथों के हुनर की तारीफ की।
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