नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। आरक्षण मुक्त भारत का सपना लिए देश भर के कई राज्यों से आए हजारों आंदोलनकारियों ने यहां रविवार को ‘आरक्षण विरोधी आंदोलन’ के बैनर तले जंतर मंतर पर एक दिन का धरना-प्रदर्शन कर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा।
संस्था ने एक बयान में कहा कि ‘आरक्षण विरोधी आंदोलन’ के माध्यम से जातिगत आरक्षण को हटाकर सबको समानता का अधिकार मिले, जिससे वास्तविक भारत के संविधान की पालना हो ऐसा प्रयास किया जा रहा है। राजनेताओं द्वारा की जा रही तुष्टिकरण की नीति और आरक्षण के खिलाफ जनता ने अपना रोष, निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग करने वाले भाजपा सांसद उदितराज का पुतला दहन कर दिखाया।
धरने में आम जन की भागीदारी रही, जिसमें सभी वर्गो, धर्मो, जातियों और सर्व समाजों का सहयोग और भागीदारी थी, जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, जाट समाज और आरक्षण के लाभान्वित लोगों की भी उपस्थिति रही।
धरने की अध्यक्षता कर रहे पंडित त्रिभुवन शर्मा (बरेली वाले) ने आरक्षण को दीमक की उपमा दी। उन्होंने कहा कि यह धीरे धीरे इस देश को खोखला कर रहा है। आंदोलन के संयोजक यू. एस. राणा ने अपने जोशीले अंदाज में धरने को संबोधित करते हुए कहा कि देश में दो वर्गो के बीच खाई को आरक्षण रूपी दानव के द्वारा बढ़ाया जा रहा है, आरक्षण के कारण देश में सबका साथ सबका विकास का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
सह संयोजक तजेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री के वक्तव्य जिसमें ‘आरक्षण की मौजूदा स्थिति पर कोई भी विचार मेरे जीते जी नहीं होगा’ द्वारा अब यह स्पष्ट हो गया है कि आरक्षण की यह लड़ाई लंबी और संघर्ष भरी रहने वाली है।
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