भोपाल, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की है कि प्रदेश की शिवराज सरकार पार्टी का हर आयोजन सरकारी खर्च पर कर रही है।
आयोग को लिखे पत्र में कांग्रेस नेता ने कहा है कि सरकारी खर्च पर राजनीति को बर्दाश्त नहीं करने और ऐसे मामलों में संलिप्तता का आरोप साबित होने पर संबंधित दल की मान्यता खत्म करने संबंधी आयोग का निर्णय स्वागतयोग्य है।
साथ ही उन्होंने आयोग का ध्यान मध्यप्रदेश में इस व्यवस्था के खिलाफ सरकारी खर्च पर आयोजन होने की ओर दिलाया है।
अरुण यादव ने पत्र में जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टर) द्वारा आयोग के निर्देशों का पालन न किए जाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि इन अधिकारियों का हाल ठीक वैसी ही है, जैसे बिल्ली को दूध की रखवाली सौंप दी जाए।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि आयोग के निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी कलेक्टरों को ऐसे मामलों में नजर रखने का दिशानिर्देश दिया गया है, मगर उन पर अमल होता नजर नहीं आता।
मप्र कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार पार्टी का हर आयोजन सरकारी खर्च पर कर रही है। प्रधानमंत्री की भोपाल में पूर्व सैनिकों के नाम पर हुई हालिया सभा में भीड़ जुटाने का पूरा जिम्मा परिवहन विभाग को दिया गया था। सभा में जबरिया लाई जाने वाली भीड़ के परिवहन और जलपान के भुगतान की राशि कलेक्टरों को पहुंचाई गई। प्रदेश के सीहोर में प्रधानमंत्री की पूर्व में हुई सभा में भी इसी तरह की व्यवस्था सरकार ने की थी।
अरुण यादव ने शहडोल लोकसभा एवं बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र में हो रहे कार्यक्रमों का जिक्र भी पत्र में किया है। इन दोनों ही स्थानों पर उपचुनाव होना है। उनका आरोप है कि इन दोनों स्थानों पर सरकारी धन का जबरदस्त दुरुपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस इकाई सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायतें प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन आयोग को सबूतों के साथ भेजी हैं।
यादव ने निर्वाचन आयोग को लिखा है कि जिलास्तरीय निर्वाचन अधिकारी कलेक्टर को बनाया जाता है, जो सरकार के अधीन काम करता है। लिहाजा, वह चाहकर भी निष्पक्ष नहीं रहा पाता और जो निष्पक्ष काम करने का साहस दिखाते हैं, उन्हें हटा दिया जाता है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
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