भोपाल – कांग्रेस विधायक कल्पना परुलकर का धैर्य तब जवाब दे गया जब प्रशासन के ढुल-मुल रवैये से हुए किसानों की फसल के नुकसान का सही आकलन नहीं हो पा रहा था,हालांकि इस प्रदर्शन को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है एवं प्रकरण दर्ज किया गया है।
कल्पना ने अपने वे तेवर महिदपुर में दिखाये जो की पिछले दिनों देखने को नहीं मिले,कल्पना किसी से अपना दर्द कह नहीं पा रहीं हैं और वह रोष इस रूप में सामने आया इसका एक महतवपूर्ण कारण यह रहा कि उन्होंने भाजपा में आने की इच्छा व्यक्त की थी जो की जिला भाजपा समिति के विरोध के चलते पूरी नहीं हो सकी थी,राजनीति को अपना जीवन बनाने वाली इस अविवाहित महिला विधायक का गुस्सा कल इतना भड़का की उन्होंने नक्सली बनने की धमकी तक दे डाली।
कभी भाजपा में प्रवेश की इच्छुक ये मात्र शक्ति राजनीति के भंवर को अपने क्रोध से समझ न सकी और प्रकरण दर्ज करवा बैठी।
अब देखना यह है की चुनाव आयोग क्या निर्णय लेता है,हां एक बात सामने आयी की यदि भाजपा में दो-चार नेता भी इस तरह होते तब प्रशासन की यह दुर्गति भाजपा कार्यकाल में नहीं हुई होती। किसानों के हुए नुकसान का उचित आंकलन प्रशासन द्वारा न करना इस आन्दोलन की पृष्ठभूमि बना।
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