अगरतला/आइजोल, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस शासित मिजोरम और वामदल के शासन वाले त्रिपुरा ने कहा है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग (सीपीसी) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति में नहीं हैं।
अगरतला/आइजोल, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस शासित मिजोरम और वामदल के शासन वाले त्रिपुरा ने कहा है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग (सीपीसी) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति में नहीं हैं।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए त्रिपुरा को 2500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत है जबकि मिजोरम को 563.22 करोड़ रुपये की हर वर्ष और जरूरत पड़ेगी।
त्रिपुरा के वित्त मंत्री भानुलाल साहा ने आईएएनएस से कहा, “त्रिपुरा सरकार के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के लिए 2500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त चाहिए।”
उन्होंने कहा, “राज्य सरकार इसे लागू करने के खिलाफ नहीं है लेकिन अभी राज्य घोर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। हम लोग मांग पर विचार कर रहे हैं।”
राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने अधिकतर अनुदान बंद कर दिए हैं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की हिस्सेदारी के तरीके को बदल दिया है। इसकी वजह से त्रिपुरा को वर्ष 2015-16 में 1356 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने सामान्य केंद्रीय सहायता, विशेष योजना सहायता और विशेष केंद्रीय सहायता भी बंद कर दी है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा कुछ प्रमुख योजनाओं के लिए वर्ष 2015-16 में 314.72 करोड़ रुपये कम धन जारी किया गया।
साहा ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के भुगतान के लिए राज्य को वर्ष 2015-16 में 500 करोड़ रुपये कम मिले हैं। और, यह तब हुआ है जबकि केंद्र को इसे देना था।
उन्होने कहा कि आशंका है कि वर्ष 2016-17 में हमें केंद्र से 1100 करोड़ रुपये और कम मिल सकते हैं।
साहा ने कहा कि त्रिपुरा सरकार त्रिपुरा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाएगी। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राज्य के दो लाख नौ हजार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लंबित 42 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने ऐसा कर दिया तो विकास और मरम्मत के सारे काम रुक जाएंगे।
मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहावला ने भी सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने में अपनी सरकार की असमर्थता जता दी है।
एक वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी ने मुख्यमंत्री के हवाले से कहा कि सातवें आयोग को लागू करने के लिए हर वर्ष 563.22 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत होगी।
राज्य के सरकारी कर्मचारियों का संघ, मिजोरम सरकारी कर्मचारी एवं कामगार महासंघ सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने की मांग कर रहा है।
मुख्यमंत्री के हवाले से अधिकारी ने कहा कि सातवें आयोग को लागू करने पर राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ बहुत अधिक बढ़ जाएगा। जब तक केंद्र सरकार राज्य को सहायता देने के लिए आगे नहीं आती, यह संभव नहीं होगा।
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