नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। आंदोलनकारी छात्रों ने करीब 20 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाए रखने के बाद गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एम जगदेश कुमार को उनके कार्यालय से जाने दिया। वहीं छात्रों के आंदोलन के बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने लापता छात्र का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) नूपुर प्रसाद ने आईएएनएस से कहा कि एसआईटी की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त मुनीषी चंद्रा करेंगे।
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को अहमद की सूचना देने पर 50,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की।
एक व्यक्ति का अपहरण करने तथा गलत तरीके से बंधक बनाकर रखने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 365 के तहत पुलिस में एक मामला दर्ज कराया गया है।
जेएनयू ने भी मामले की जांच शुरू की है।
अहमद की मां फातिमा ने अपने बेटे का पता लगाने के लिए अधिकारियों से मदद की अपील की।
फातिमा ने सीएनएन न्यूज 18 चैनल से कहा, “एक बार मुझे अपने बेटे का चेहरा देखना है। इसके बाद आप उसे एक महीने तक रखना। मैं एक शब्द नहीं कहूंगी। लेकिन बस मुझे एक बार अपने बेटे का चेहरा देखने दो।”
सुबकती महिला ने कहा, “मैं बेहद छोटी जगह से हूं। मैं अपने बच्चे को सुरक्षित देखना चाहती हूं। मुझे नहीं पता कि उसने कुछ खाया भी है या भूखा है।”
बीते 14 अक्टूबर की रात बेहद घबराई अवस्था में अहमद का फोन आने के बाद उत्तर प्रदेश के बदायूं से दिल्ली पहुंची फातिमा ने कहा, “मेरी सबसे अपील है कि मेरे बच्चे को ढूंढने में मेरी मदद कीजिए।”
छात्रों ने बुधवार को लापता छात्र नजीब अहमद के मामले को लेकर प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर प्रदर्शन करना शुरू किया था। अहमद बीते छह दिन से लापता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने कुलपति सहित शीर्ष अधिकारियों को उनके कार्यालय में रोके रखा था।
वामपंथी छात्र संगठन और कांग्रेस की छात्र इकाई सहित प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अहमद का पता लगाने में निष्क्रिय बने रहने का आरोप लगाया।
वामपंथी छात्र संगठन, आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर एक विवाद के बाद स्नातक छात्र के अपहरण का आरोप लगा रहे हैं।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के एक सदस्य सनी धीमान ने कहा, “एक कुलपति की क्या जिम्मेदारी है, एक एफआईआर भी नजीब अहमद की मां ने दर्ज कराई है। प्राक्टोरियल जांच में केवल एक व्यक्ति की गलती पाई गई, दूसरों लोगों का क्या हुआ। ”
धीमान ने कहा कि स्कूल ऑफ रशियन स्टडीज का एक छात्र भी विवाद में शामिल था और उसने बुधवार को अहमद से लड़ाई करने की कोशिश की थी।
एबीवीपी के अलावा सभी छात्र राजनीतिक निकायों ने विरोध में हिस्सा लिया और विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया।
वहीं, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को जेएनयू में पिछले छह दिनों से लापता छात्र और उसके बाद के घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी।
रिजिजू ने राजनाथ से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, “विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य अधिकारियों को बंधक बनाना बहुत गलत है। ऐसा लग रहा है कि छात्र जेएनयू अध्ययन के लिए नहीं, राजनीति करने जाते हैं।”
रिजिजू ने कुलपति एम. जगदीश कुमार और दूसरे अधिकारियों को इमारत में रोके रखने लिए छात्रों की आलोचना करते हुए कहा, “जेएनयू एक बड़ा संस्थान है। छात्रों को अध्ययन पर ध्यान कें द्रित करना चाहिए। उन्हें अपनी सारी गतिविधियां कानून-व्यवस्था के दायरे में रखनी चाहिए।”
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