बिहार सरकार किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज राहत मुहैया कराए : राधा मोहन

मोतिहारी/नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने सोमवार को बिहार सरकार से कहा कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र की तरह बिहार सरकार भी किसानों को चार प्रतिशत ब्याज राहत मुहैया कराए, ताकि उन्हें शून्य प्रतिशत पर कृषि ऋण मिल सके।

बिहार में अभी किसानों को सात प्रतिशत ब्याज दर से जो ऋण मिलता है, उसका लगभग तीन प्रतिशत ब्याज राहत केन्द्र सरकार देती है।

राधा मोहन ने मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा आयोजित प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के सहकारिता सम्मेलन के अवसर पर यह बात कही। सिंह ने आगे कहा, “देश को अगर आगे बढ़ाना है, तो किसान, कृषि एवं गांवों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। किसानों की आय में वृद्धि करनी पड़ेगी और इसके लिए कृषि में पुन: क्रांति लानी पड़ेगी।”

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा, “आज बिहार राज्य में लगभग 8463 प्राथमिक सहकारी साख समितियां कार्य कर रही हैं, तथा लगभग 521 व्यापार मंडल समितियां कार्यरत हैं, और मोतिहारी जनपद में लगभग 372 प्राथमिक सहकारी समितियां कार्यरत हैं।”

राधा मोहन ने कहा, “बिहार में पैक्सों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से जनवितरण प्रणाली के लिए अधिक अनुदान दिया जाना चाहिए। पैक्सों के माध्यम से धान एवं गेहूं की अधिप्राप्ति पूरी तरह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, ताकि कृषकों को उनके उत्पादन का सरकार द्वारा घोषित उचित समर्थन मूल्य प्राप्त हो, साथ ही इन पैक्सों को कृषकों के हितकारिक प्रजातांत्रिक मूल्यों पर आधारित संस्था के रूप में विकसित करना होगा।”

सिंह ने कहा, “भंडारण के क्षेत्र में बिहार के 50 प्रतिशत पैक्सों के पास अपने स्वयं के गोदाम नहीं हैं, और जबतक भंडारण की क्षमता में वृद्धि नहीं होगी तब तक इस क्षेत्र के किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।”

राधा मोहन ने कहा, “भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए समेकित सहकारी विकास परियोजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं कृषि रोड मैप के अंतर्गत अधिक से अधिक पैक्स में गोदाम का निर्माण कराया जाना बहुत जरूरी है। लघु उद्योग के रूप में विकसित करने हेतु राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषि रोड मैप के अंतर्गत चावल मिलों का भी स्थापित किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “बिहार के समस्त 8463 प्रारंभिक सहकारी समितियों को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए व्यापक प्रयास जारी है। इसमें लगभग 2000 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका 50 प्रतिशत भाग केन्द्र सरकार द्वारा नाबार्ड के जरिए वहन किया जा रहा है तथा 45 प्रतिशत राज्य सहकार एवं पांच प्रतिशत जिला राज्य सहकारी बैंक द्वारा भुगतान किया जाएगा।”

सिंह ने कहा, “वर्ष 2015-16 में बिहार राज्य को डेयरी सहकारिता के लिए 149 करोड़ रुपये, आईसीडीपी के लिए 51.05 करोड़ रुपये, शीतगृह सहकारिता के लिए 12.5 करोड़ रुपये एवं विपणन से संबंधी समितियों को 28.10 करोड़ रुपये तथा कुल 240.80 करोड़ रुपये की राशि मुहैया कराई गई।”

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