नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में एलपीजी वितरकों के सबसे बड़े संघ, फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ इंडिया (एफएलडीआई) ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (पीएमयूवॉय) में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया।
एफएलडीआई ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उसने इस योजना को लेकर सुरक्षा और कार्यान्वयन के बारे में गंभीर चिंताएं जाहिर की थी, लेकिन अभी तक मंत्रालय ने इस पर कार्रवाई नहीं की। सहारनपुर में हाल ही में हुई सिलेंडर गैस लीक की एक घटना में पूरे परिवार की मौत हो गई थी, जिसमें सिर्फ चार साल का बच्चा बच गया था तथा एक अन्य हादसे में एक परिवार का एक मात्र कमानेवाला पांच छोटी बेटियों और एक गर्भवती पत्नी को पीछे छोड़कर दुनिया से चला गया था।
एफएलडीआई के अध्यक्ष पी.वी. राव ने कहा, “आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल जैसे पीएसयूज की भूमिका की जांच होनी चाहिए। हम हैरान हैं कि इन ओएमसीज ने क्यों मंत्रालय को मौजूदा ‘असुरक्षित’ रूप में इस योजना को कार्यान्वित करने में संभावित खतरे के बारे में अवगत नहीं कराया? इसकी जगह ओएमसीज ने एक दूसरे के साथ प्रतियोगिता करनी शुरू कर दी और वितरकों को पूर्व निर्धारित अवास्तविक लक्ष्य को पूरा करने के लिए मजबूर कर दिया। वे दिशा निर्देश तो तय करते हैं, लेकिन वितरकों को कभी उन का पालन नहीं करने देते हैं। वितरकों को पीएमयूवॉय के अधीन कनेक्शन रिलीज करने के लिए मजबूर किया गया व उन्हें हर कनेक्शन पर नुकसान उठाना पड़ा।”
एफएलडीआई के महासचिव पवन सोनी ने कहा, “पीएमयूवाई योजना अच्छे इरादे और बुरा कार्यान्वयन का एक अच्छा उदाहरण है। इस योजना में लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक तौर पर बदलने की क्षमता है। लेकिन सही प्लानिंग न होने व बेतरतीब कार्यान्वयन के कारण यह न सिर्फ गरीब लोगों की जान को जोखिम में डालती है बल्कि यह भविष्य में उन्हें भारी वित्तीय बोझ में भी डालेगी।”
एसोसिएशन ने घोषणा की है कि अगर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय उनके साथ योजना के कार्यान्वय को लेकर बैठक नहीं बुलाती है तो सभी वितरक अखिल भारतीय हड़ताल पर चले जाएंगे।
आठ हजार करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना इस साल एक मई को लांच की गई थी, जिसका उद्देश्य पांच करोड़ गरीब घरों में मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था। यह योजना, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा बनाई व लागू की गई है और इसके तहत अब तक 15 राज्यों में 80 लाख से अधिक गरीब परिवारों को लाभ हुआ है।
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