डीएनडी पर फैसला सुरक्षित, फिलहाल टोल फ्री (लीड-1)

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने नोएडा स्थित डीएनडी फ्लाइवे को टोल फ्री करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।

दिल्ली-नोएडा-डायरेक्ट फ्लाइवे को टोल फ्री करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर, न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति एल.नागेश्वर राव ने संकेत दिया कि न्यायालय एक स्वतंत्र ऑडिर की नियुक्ति कर सकता है, जो इस बात का पता लगाएगा कि कंपनी ने अपनी लागत तथा 20 फीसदी मुनाफा वसूल किया है या नहीं।

कंपनी की तरफ से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट टोल प्लाजा का निर्माण व संचालन के समझौते से जब न्यायालय को अवगत कराया, तो पीठ ने कहा, “समझौते के तहत आपको कितना वसूलने का अधिकार दिया गया है? समझौते के तहत कितना वसूलना जायज है? आप कितना वसूलने के हकदार हैं?”

पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि कंपनी ने परियोजना पर जितना खर्च किया, उससे दोगुना वसूल चुकी है और ‘यह काफी है। अब घर जाइए।’

पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय ने आपसे कहा है कि आपने 400 करोड़ रुपये लगाए और 1,100 करोड़ रुपये वसूल किए।”

टोल टैक्स वसूली पर लगी रोक को हटाने की मांग करते हुए सिंघवी ने कहा कि कंपनी फैसला आने तक वसूले गए पैसों को अलग अकाउंट में रखेगी और न्यायालय द्वारा नियुक्त ऑडिटर दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगा।

सिंघवी ने न्यायालय से कहा कि डीएनडी ब्रिज सात फरवरी, 2001 से शुरू हुआ और साल 2007-08 तक यातायात अनुमान से कम रहा, जिसके कारण कॉस्ट रिकवरी तथा रिटर्न में कमी आई।

उन्होंने न्यायालय से कहा कि साल 2008 के बाद डीएनडी से एनटीबीसीएल की आय बढ़ी। उन्होंने कहा कि यह पहली परियोजना है, जिसे पूरी तरह कंसेसिनायर के तौर पर क्रियान्वित किया गया, वह भी वैसे वक्त में जब कोई कंपनी आने को तैयार नहीं थी।

उच्च न्यायालय के आदेश को त्रुटियुक्त बताते हुए सिंघवी ने कहा कि कंपनी ने टोल वसूलना बंद कर दिया है, लेकिन वह डीएनडी पर दुर्घटना, उसकी सुरक्षा व मरम्मत के लिए जिम्मेदार है।

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