नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने यहां बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की रेटिंग ‘बीबीबी-ए3’ पर बरकरार रखी है। वहीं, वित्त मंत्रालय का मानना है कि सतत आर्थिक सुधार, व्यापक आर्थिक स्थिरता और देश के प्रति वैश्विक निवेशकों की भावना को देखते हुए इसमें उन्नयन की जरूरत है।
स्टैंडर्ड एंड पुअर्स एजेंसी ने एक बयान में कहा, “हम भारत की दीर्घकालिक रेटिंग ‘बीबीबी’ और अल्पकालिक सॉवरिन क्रेडिट रेटिंग ‘ए-3’ होने की पुष्टि करते हैं। हालांकि नीतिगत स्तर पर सुधार से भारत की आर्थिक और वित्तीय प्रदर्शन की संभावना को मजबूती मिलती है। अधिक राजकोषीय घाटे, भारी कर्जो का बोझ और प्रति व्यक्ति कम आय के कारण भारत की रेटिंग कम रही है।”
एजेंसी ने कहा कि भारत की रेटिंग देश के एक्सटर्नल प्रोफाइल और मौद्रिक साख में सुधार का प्रतिनिधित्व करती है। साथ ही एजेंसी ने 2017 की पहली छमाही में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने की तैयारी की सराहना की, लेकिन इससे भारत की रेटिंग को अपग्रेड नहीं किया गया।
एसएंडपी द्वारा रेटिंग को स्थिर रखने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दास ने कहा कि रेटिंग एजेंसियों को आत्मावलोकन करना चाहिए कि भारत की रेटिंग में सुधार क्यों नहीं किया गया।
दास ने कहा, “यह समझ में नहीं आ रहा कि भारत की रेटिंग बढ़ाई क्यों नहीं गई। रेटिंग एजेंसियों को आत्मविश्लेषण करने की जरूरत है कि उनकी सोच और विदेशी निवेशकों की सोच एक जैसी क्यों नहीं है। निवेशकों का मानना है कि भारत का मूल्यांकन अत्यधिक कम किया गया है। कनाडा के कई निवेशक अगले एक-दो सालों में भारी निवेश करने वाले हैं।”
हालांकि दास ने कहा कि सरकार रेटिंग एजेंसियों के मूल्यांकन को सकारात्मक ढंग से ले रही है।
एसएंडपी की रेटिंग में कहा गया है, “भारत की मजबूत लोकतांत्रिक संस्था और एक स्वतंत्र प्रेस, जो नीतियों की स्थिरता और उसके सटीक आकलन को बढ़ावा देती है। ये देश के कमजोर प्रति व्यक्ति आय और कमजोर सार्वजनिक वित्त से उत्पन्न संभावित खतरों को संतुलित करते हैं।”
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