महात्मा गांधी के प्रौत्र कनु गांधी पंचतत्व में विलीन

सूरत (गुजरात), 8 नवंबर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी के प्रौत्र और नासा के पूर्व वैज्ञानिक कनु रामदास गांधी का यहां अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनका सोमवार को निधन हो गया था।

सूरत (गुजरात), 8 नवंबर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी के प्रौत्र और नासा के पूर्व वैज्ञानिक कनु रामदास गांधी का यहां अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनका सोमवार को निधन हो गया था।

कनु गांधी के पुराने मित्र धीमंत बधिया ने मंगलवार को कहा, “उनकी 90 वर्षीय पत्नी शिवालक्ष्मी ने चिता को मुखाग्नि दी, क्योंकि इस दंपति को कोई संतान नहीं थी। वह भावनात्मक रूप से पूरी तरह नियंत्रित थीं, और उन्होंने तीन घंटा लंबे कर्मकांड में हिस्सा लिया।”

उन्होंने कहा कि सूरत कांग्रेस के कई सारे कार्यकर्ता, गुजरात सरकार के एक प्रतिनिधि और महात्मा गांधी की पौत्री नीलम पारिख के अलावा स्थानीय नागरिकों ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। अंतिम संस्कार के समय कोई 400 लोग वहां उपस्थित थे।

कनु की बुजुर्ग बहन मुंबई निवासी उषा गोकानी, और बेंगलुरू निवासी उनकी एक अन्य बहन पूर्व राज्यसभा सदस्य सुमित्रा कुलकर्णी ने अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया। कुलकर्णी हाल ही में कनु को देखने आई थीं।

संयोगवश कनु की महात्मा गांधी के साथ एक तस्वीर काफी लोकप्रिय है, जिसमें वह मार्च-अप्रैल 1930 के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह के दौरान गुजरात के दांडी गांव में समुद्र तट पर गांधी की लाठी पकड़े आगे चलते हुए दिखाई देते हैं।

बधिया ने कहा कि कनु को 22 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ा था और मस्तिष्काघात भी हुआ था, जिसके बाद उनके शरीर को लकवा मार गया था और वह तभी से कोमा में थे और उससे बाहर नहीं निकल पाए।

कनु की पत्नी शिवालक्ष्मी पति के निधन से बहुत व्यथित थी, फिर भी वह उनका अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गईं और दाहसंस्कार के बाद वह पूरी तरह मौन हो गईं।

दाहसंस्कार के बाद बधिया उन्हें लेकर राधाकृष्ण मंदिर गए, जहां वे (दंपति) पिछले तीन सप्ताह से रह रहे थे।

बधिया ने आईएएनएस से कहा, “राधाकृष्ण मंदिर ने कनु की बखूबी सेवा की और उन्हें पास के शिव ज्योति हॉस्पीटल में भर्ती कराया। अब उन्होंने उनकी पत्नी शिवालक्ष्मी की आजीवन देखरेख करने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने कहा कि शिवालक्ष्मी बहरी हैं और उन्हें वृद्धावस्था की अन्य बीमारियां भी हैं। इसलिए मंदिर प्रशासन ने उनकी 24 घंटे देखभाल के लिए एक सहायक नियुक्त कर रखा है। मंदिर प्रशासन उनकी दवा और अन्य जरूरतें भी पूरी कर रहा है।

इस मंदिर का संचालन पंजाबी समुदाय के लोग करते हैं, और उन्होंने उन्हें मंदिर के संत निवास में प्रथम तल पर रहने की जगह दे रखी है, जहां वह अपने जीवन के बाकी समय बिताएंगी।

बधिया ने कहा कि कनु के उल्लेखनीय योगदान और पेशेवर पृष्ठभूमि के बावजूद महात्मा गांधी द्वारा गुजरात और देश के अन्य हिस्सों में स्थापित संस्थाओं या महात्मा गांधी के नाम पर अन्य लोगों द्वार स्थापित संस्थाओं का कोई भी प्रतिनिधि अंतिम संस्कार के समय उपस्थित नहीं था।

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