नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। विमुद्रीकृत नोटों को बदलने और नकदी निकालने का संकट जारी है और इस दौरान 11 नवंबर से 13 नवंबर के बीच 44 प्रतिशत लोगों को एटीएम बंद मिले हैं।
नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। विमुद्रीकृत नोटों को बदलने और नकदी निकालने का संकट जारी है और इस दौरान 11 नवंबर से 13 नवंबर के बीच 44 प्रतिशत लोगों को एटीएम बंद मिले हैं।
नागरिक आदान-प्रदान मंच, लोकल सर्किल्स सिटिजन द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, सर्वेक्षण में जिन 9,000 नागरिकों को शामिल किया गया, उनमें से 14 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें दो घंटे इतजार करने पड़े, आठ प्रतिशत ने कहा कि उन्हें 10 मिनट के भीतर नकदी मिल गए, जबकि 34 प्रतिशत लोग किसी एटीएम पर गए ही नहीं।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि इसी तरह 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें नोट बदलने के लिए दो घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा, 21 प्रतिशत ने 30 मिनट से दो घंटे तक इंतजार किया, 11 प्रतिशत ने कहा कि वे 10 मिनट या इससे भी कम समय में नोट बदल लिए, जबकि 39 प्रतिशत लोग नोट बदलने के लिए बैंक गए ही नहीं।
इसके अतिरिक्त एटीएम और बैंकों को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए नागरिकों ने विमुद्रीकरण योजना के नकारात्मक प्रभाव और प्रक्रिया में खामियों को भी रेखांकित किया।
नागरिकों ने कहा कि योजना शुरू करने से पहले पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट उपलब्ध नहीं कराए गए। नागरिकों ने यह भी कहा कि योजना की घोषणा से पहले ही गोपनीयता बरतते हुए एटीएम को नए नोटों के अनुकूल बना दिया जाना चाहिए था।
सर्वेक्षण के अनुसार, 40 प्रतिशत से अधिक लोग बैंकों की कतार में किसी और काम से खड़े थे।
चूंकि 80 प्रतिशत नोट 500 रुपये और 1000 रुपये के हैं, लिहाजा व्यापारियों का कहना है कि माल, स्थानीय बाजारों और अन्य बाजारों में कारोबार 50 प्रतिशत घट गया है। अधिकांश नागरिकों ने कहा कि उन्हें इस कठिनाई के आगामी महीनों में भी जारी रहने की आशंका है।
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