रालोद की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अनिल दुबे ने कहा, “रुपये के लेन-देन पर रोक लगने की वजह से लाखों लोग भूख, प्यास, चिकित्सा से व्याकुल है। जेब में पैसे होने के बावजूद भी लोग मौत के शिकार हो रहे हैं।”
दुबे ने कहा, “केंद्र सरकार ने यह तानाशाही फरमान लागू करते समय इसके व्यावहारिक पक्ष ध्यान नहीं दिया। नोटबंदी से पहले सरकार ने यदि छोटे नोटों की पूर्ण व्यवस्था कर ली होती तो किसान, मजदूर रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले लोग व छोटे व्यापारी, पटरी दुकानदार आदि को रोटी के लिए संघर्ष न करना पड़ता।”
उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने कहा था कि सिर्फ दो तीन दिन की दिक्कत होगी, लेकिन अब एक सप्ताह बीतने के बाद भी अव्यवस्था से निपटने के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह से फेल है। अब प्रधानमंत्री 50 दिन का समय मांग रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि देवउत्थानी एकादशी के बाद शादियां शुरू हो चुकी हैं। लोगों ने अपने बच्चों की शादी तय कर रखी है और उसके लिए पैसों का इंतजाम कर रखा था, लेकिन सरकार के निर्णय से लोगांे को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।
रालोद नेता ने स्थिति को सामान्य करने के लिए एटीएम वैन चलाने के साथ सहकारी बैंकों, ग्रामीण बैंकों तथा डाकघरों में पर्याप्त नोटों की उपलब्धता की मांग की है।
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