पणजी, 22 नवंबर (आईएएनएस)। गोवा के पणजी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के 47वें संस्करण में फोकस देश कोरिया के फिल्म निर्माताओं ने गोवा में मंगलवार को मीडिया से बातचीत की। इस सेक्शन के तहत कुल 18 फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। उद्घाटन फिल्म ‘टनल’ का मंगलवार को गोवा के कला अकादमी में प्रदर्शन किया गया।
‘टनल’ के निर्माता किम सियोंग-हून ने कहा कि भारत का उनका यह पहला दौरा है और इस स्थल पर नए दर्शकों को देखकर वे रोमांचित हैं।
कोरियाई फिल्म परिषद (केओएफआईसी) के प्रतिनिधि ने भी महोत्सव के दौरान 18 फिल्मों के प्रदर्शन के बारे में बताया और भारतीय-कोरियाई संबंधों को इस कदम द्वारा और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि 300,000 डॉलर के बजट से कोरिया प्रति वर्ष तीन फिल्मों का निर्माण सह उत्पादन के तहत करता है।
डांग्जू (‘पोट्रेट ऑफ पोएट’) के निर्माता ली जून-इक ने इस मौके पर दक्षिण कोरिया में नियंत्रण हटने के बाद फिल्म उद्योग पर इसके प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि 70 के दशक में कोरियाई बाजार में हॉलीवुड फिल्मों की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत और कोरियाई फिल्मों की हिस्सेदारी मात्र 20 प्रतिशत ही थी। लेकिन नियंत्रण के पूरी तरह हट जाने के बाद कोरियाई सिनेमा की स्थानीय बाजार में 30 प्रतिशत हो गई है और अब हॉलीवुड की भागीदारी घटकर 50 प्रतिशत रह गई है।
कोरियाई फिल्म निर्माताओं ने कहा कि तकनीक के हिसाब से भी कोरियाई फिल्में समय के अनुसार बन रही हैं। कोरियाई निर्देशकों को विश्वास है कि अगर भारतीय दर्शक हॉलीवुड की फिल्मों को पंसद करते हैं तो उन्हें कोरियाई फिल्में भी पसंद आएंगी, क्योंकि हॉलीवुड की फिल्मों की तरह कोरियाई फिल्में भी विकसित तकनीकी से बनाई जा रही हैं।
निर्माताओं ने कहा, “फिल्म ‘टनल’ पारंपरिक आपदा फिल्म की शैली को झूठलाती है। आपदा के जरिए यह फिल्म हमें सामान्य वास्तविकता से ऊपर उठाकर मानवीय जीवन की गरिमा की याद दिलाती है।” कोरियाई फिल्म उद्योग के लोग इसके प्रदर्शन को लेकर खुश थे।
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