व्यापार मेला : स्पाइसेस बोर्ड ने पूर्वोत्तर के स्वाद का लगाया तड़का

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। इस साल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) में आने वाले दर्शकों को पूर्वोत्तर के लजीज पकवानों का स्वाद चखने को मिला जिन्हें पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुंगधित एवं स्वादिष्ट आर्गेनिक मसालों से तैयार किया गया। इन मसालों को स्पाइसेस बोर्ड ने पेश किया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत स्पाइसेस बोर्ड को यहां प्रगति मैदान में चल रहे व्यापार मेले में प्रचार-प्रसार के अपने प्रयासों में काफी सफलता मिली है। स्पाइसेस बोर्ड पूर्वोत्तर क्षेत्र में उगाए जाने वाले मसालों की गुणवत्ता के बारे में जागरूकता कायम कर रहा है और लोगों को इस क्षेत्र के व्यंजनों के स्वाद से परिचित करा रहा है।

बोर्ड ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के पकवानों के लाइव प्रदर्शन के लिए दिल्ली स्थित रेस्तरां रोसांग के साथ टाई-अप किया जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के असली व्यंजनों के लिए जाना जाता है। लाइव प्रदर्शन में तेजपत्ता, मिर्च, हल्दी, धनिया, तुलसी और प्याज, भूत जोलोकिया या घोस्ट पीपर सहित विभिन्न तरह की मिर्ची जैसे मसालों के तड़के के साथ तैयार शाकाहारी एवं मांसाहारी व्यंजनों को पेश किया गया। भूत जोलोकिया एक समय दुनिया की सबसे तीखी मिर्ची के रूप में मशहूर थी।

स्टॉल का प्रबंधन किया रोसांग की मालकिन मैरी लालबोई जो मणिपुर में जन्मी मिजो हैं और शेफ वारी महर जो मणिपुर की हैं। इन दोनों ने व्यापार मेले पहले पांच दिन के दौरान दस व्यंजन बनाए ताकि लोग व्यंजन को देख सकें और उसका स्वाद चख सकें।

इन व्यंजनों में गौताई सा कान (मिर्च, मिजो तुलसी और अदरक के साथ स्वादिष्ट मांसाहारी व्यंजन), नघुई नगोसिंग (भुना हुई बोनलेस मछली-टमाटर, नींबू के पत्ते, धनिया और अदरक तथा मिर्च के स्वाद से भरपूर), लाफु थारो पकनाम (केले के फूल, ताजा बांस, प्याज के साथ पकाया हुआ तथा केले के पत्ते में लपेट कर उबाला हुआ), तथा सिनाजु (कमल की जड़, कटी हुई गोभी, मीठे आलू के पत्ते के साथ बना हुआ तथा पूर्वोत्तर मसालों के जरिए स्वादिष्ट बनाया हुआ) शामिल हैं।

स्पाइसेस बोर्ड की एक्सपोर्ट प्रमोशन ऑफिसर ममता रूपोलिया जो स्टॉल का प्रबंधन कर रही हैं, ने कहा कि लोगों की प्रतिक्रिया बहुत ही उत्साहवर्धक रही है। मसालों की थोक खरीद के बारे में काफी लोगों ने जानकारियां ली हंै तथा मसालों तथा मसालेदार उत्पादों की खूब खुदरा बिक्री हुई है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के मसालों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के कुछ सबसे बेहतरीन मसालों का उत्पादन करता है।

उन्होंने कहा, “जहां तक मसालों का संबंध है लोगों को उत्तर-पूर्व की अद्धितीय विविधता का अभी तक पूरी तरह से पता नहीं चला है। हम चाहते हैं कि लोगों में इस बात की जागरूकता कायम हो कि इस क्षेत्र की जलवायु एवं मिट्टी मसालों के लिए बहुत ही उपयुक्त है तथा अनेक मसालों को घरों में खाद एवं रसायन का उपयोग किए बगैर उगाया जाता है और इस तरह से ये मसाले सौ फीसदी आर्गेनिक हैं।”

पांच दिन का कुकिंग प्रदर्शन शुक्रवार को सम्पन्न हो गया लेकिन स्टॉल 27 नवम्बर तक व्यापार मेला समाप्त होने तक खुला रहेगा।

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