नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। क्यूबा के क्रांतिकारी नेता और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्हें नेहरू-गांधी परिवार और खासतौर से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनके भाई-बहन के रिश्ते के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।
जंग-ए-मैदान के माहिर रणनीतिकार और अपनी छोटी-सी गुरिल्ला सेना के जरिए 1959 में सैन्य तानाशाह फुलखेंशियो बतीस्ता का तख्ता पलट कर चुके कास्त्रो ने इंदिरा के प्रति भाई का प्यार दर्शाते हुए 1983 में नई दिल्ली में संपन्न हुए गुट निरपेक्ष सम्मेलन में उन्हें गले लगा लिया था।
विज्ञान भवन में वर्ष 1983 में 7-12 मार्च तक सातवें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन (नाम) में क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे कास्त्रो ने सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर कहा था कि हवाना में 1979 में संपन्न हुए सम्मेलन के मेजबान के तौर पर उन्हें अपनी ‘बहन’ इंदिरा गांधी को सम्मेलन का गेवल सौंपने में खुशी और गर्व का अनुभव हो रहा है।
उसके बाद दोनों मंच से उठे और इंदिरा ने लकड़ी का गेवल थामने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन कास्त्रो यूं ही खड़े रहे। इंदिरा ने दोबारा हाथ बढ़ाया, लेकिन कास्त्रो वहीं खड़े मुस्कुराते रहे।
उसके बाद इंदिरा ने जब झिझकते हुए तीसरी बार हाथ बढ़ाया, तो कास्त्रो ने इंदिरा को आश्चर्यजनक रूप से गेवल सौंपने के साथ ही सम्मेलन में मौजूद सैकड़ों प्रतिनिधियों के सामने गले लगा लिया।
पूरा सम्मेलन कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इंदिरा के लिए यह अप्रत्याशित था। कास्त्रो द्वारा इंदिरा को गले लगाने का यह क्षण हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गया।
कास्त्रो की भारत की यह अंतिम यात्रा थी।
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