तिरुवनंतपुरम, 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। केरल के लोक निर्माण विभाग मंत्री जी. सुधाकरन ने सोमवार को कहा कि वह अपने विभाग में राजनीतिज्ञ-ठेकेदार-इंजीनियरों के बीच सांठगांठ को तोड़ने में कामयाब रहे हैं और इसकी जड़ों को काटने के लिए कुछ विशिष्ट उपाय किए हैं।
सुधाकरन ने यहां संवाददाताओं से कहा, “परियोजना की अनुमानित लागत का खाका तैयार करने के साथ ही भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। निर्माण सामग्री तथा उसकी निगरानी के स्तर पर यह आगे बढ़ता है। गैरकानूनी काम करने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएगा।”
पीडब्ल्यूडी सभी सरकारी इमारतों के निर्माण व रख-रखाव के अलावा, तटीय राज्य की 40,000 किलोमीटर लंबी सड़क की देखरेख करती है।
मंत्री ने कहा, “संशोधित अनुमानों को सौंपने के काम को हमने खत्म करने का फैसला किया है, जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अवैध काम है। सभी कार्यो की पैनी निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब हमने सामाजिक लेखा समितियों के गठन का फैसला किया है, जो सरकारी कार्यो की निगरानी के लिए शक्ति के साथ एक निगरानी निकाय होगा।”
मई 2016 में हुए विधासभा चुनाव के बाद पिनारायी विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चे की सरकार का गठन हुआ है।
सुधाकरन ने कहा कि मंत्री पद संभालते ही पहला काम उन्होंने लगभग 1,400 विभागीय अभियंताओं की एक बैठक बुलाई और उन्हें एलडीएफ सरकार उम्मीदों से अवगत कराया।
मंत्री ने कहा कि तटीय राज्य में राजमार्गो के विकास की सुरक्षा व नियंत्रण के लिए केरल राजमार्ग संरक्षण अधिनियम, 1999 को सही तरीके से लागू किया जाएगा।
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