पटना, 12 दिसंबर (आईएएनएस)। जाने-माने फिल्म निर्देशक नीरज घेवन ने यहां सोमवार को कहा कि आज व्यावसायिक और समानांनतर फिल्मों का दायरा सिमट रहा है, अच्छी कहानी पर बनी फिल्में ही अब लोगों को पसंद आ रही है।
बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम और कला संस्कृति विभाग, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘पटना फिल्म फेस्टिवल 2016’ में ‘हिंदी क्षेत्र में हिंदी सिनेमा’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा, “आज स्थानीकरण (लोकलाइजेशन) का दौर है, इसलिए सिनेमा के माध्यम से भी आज लोग ऐसी ही फिल्में पसंद कर रहे हैं। आज हम 50-60 के दशक के शहरों को उस समय फिल्माई गई लोकेशन के माध्यम से ही जान पाते हैं, हालांकि आज इसमें कमी आई है।”
फिल्म ‘मसान’ के निर्देशक ने हिंदी क्षेत्र पर चर्चा करते हुए कहा, “हिंदी सिनेमा में उत्तर भारत के छोटे शहरों का प्रस्तुतीकरण व्यंगात्मक तरीके से होता रहा है। मुझे लगता है कि यह भी हिंदी सिनेमा की एक समस्या रही है। हम लोग छोटे शहरों को ही प्रस्तुत करने की लगातार कोशिश करते हैं।”
कान्स फिल्म फेस्टिवल के अनुभव की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कान्स में अपनी फिल्म का प्रतिनिधित्व करना काफी आनंददायक पल था। वहां मनोरंजन की एक नई परिभाषा से भी रूबरू होने का मौका मिला। सीटी मारना, लड़की के शर्माने पर या किसी चुटकुले पर हंसना ही मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) नहीं है, उसके विषय में सोचना भी मनोरंजन है।
फिल्म ‘मसान’ की चर्चा करते हुए घेवन ने कहा, “फिल्म में पटकथा (स्क्रिप्ट) सर्वोपरि है। मैं भी इसका मुरीद हूं। मैं अपने फिल्म के अभिनेता से पटकथा के अनुसार किरदार की उम्मीद करता हूं। अच्छी फिल्मों के लिए बहुत ही ईमानदारी से लिखी कहानी के अलावा बाकी चीजों पर भी ईमानदारी की जरूरत है।”
परिचर्चा में भाग लेते हुए फिल्म ‘मसान’ के अभिनेता संजय मिश्रा ने कहा कि बिहार में फिल्म संस्कृति विकसित करने के लिए यहां पहले माहौल बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि बिहार पर सिनेमा नहीं बन रहा है, लेकिन हमें ये समझना होगा कि केवल सिनेमा ही बिहार पर बना या शूटिंग से लेकर रिलीज तक की पूरी प्रक्रिया बिहार में हुई।
उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य होता है कि ज्यादातर फिल्में अब मुंबई में ही शूट की जा रही हैं।”
मिश्रा ने ‘मसान’ के बारे में कहा, “ये सिर्फ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म भर नहीं थी। एक कलाकार के रूप में आप अगर खुद से न्याय नहीं करेंगे तो दुनिया आपको नहीं मानेगी।”
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