शहीद का खून बेकार नहीं जाता : कल्बे जव्वाद (फोटो सहित)

मजलिस तिलावते कुरान से शुरू हुई। उसके बाद शायरों ने शहीद निम्र को श्रद्धांजलि दी।

अपने संबोधन में जव्वाद ने कहा कि जालिमों ने एक धर्मगुरु की सच्चाई और न्याय की मांग को अपराध का नाम देकर फांसी दे दी। फांसी देने का ये फैसला सऊदी शासकों के इंसाफ और इंसानियत व इस्लाम दुश्मनी का स्पष्ट सबूत है।

उन्होंने बताया कि अयातुल्लाह शहीद शेख बाकिर उल निम्र मुसलमानों के अधिकारों की वसूली, चरमपंथी टोले के आतंकवाद के खिलाफ और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे। जालिम सऊदी सरकार कभी इंसाफ मांगने वालों को जिंदा देखना नहीं चाहती, इसीलिए उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं।

मौलाना ने कहा कि शहादत का जिक्र करना जिंदा कौमों की निशानी है। शहादत कौमों के खयालात व नजरियात में इंकिलाब पैदा करती है।

उन्होंने कहा कि जो कौमें अपने शहीदों को याद नहीं करतीं वे खत्म हो जाती हैं। ये नामुमकिन है कि शहीद की कुर्बानी बर्बाद हो। यह कुदरत के कानून के खिलाफ है। शहादत एक हथियार है, जिससे जालिम खुद अपनी गर्दन काट लेता है।

मौलाना ने कहा कि शेख निम्र की शहादत के बाद सऊदी सरकार का पतन हुआ और इंशा अल्लाह अब इससे भी ज्यादा बुरे दिन देखना बाकी हैं।

दूसरी मजलिस 6 जनवरी को नमाजे जुमा के बाद यहां की आसफि मस्जिद में होगी।

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