जबलपुर (मप्र), 8 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यहां रविवार को कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने मानवता और राष्ट्रीय अखंडता के लिए जो योगदान दिए, वह कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता। आज 350 वर्ष बाद भी उनके जीवन र्पयत संघर्ष और बलिदान का चित्र भारत में देशभक्त योद्धाओं के लिए चरित्र निर्माण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
जबलपुर के शिवाजी मैदान में आयोजित गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाशोत्सव के कार्यक्रम में रविवार को शाह ने कहा, “हमारा सीना गर्व से फूल जाता है, जब हम देखते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा में बलिदान देने में सिख समुदाय अव्वल नंबर पर रहा है। हम उनकी बहादुरी के प्रति श्रद्धावनत हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने खालसा के रूप में जो बीजांकुर किया था, वह आज वटवृक्ष की तरह फैल चुका है और सभी को छाया का शीतल स्पर्श दे रहा है। हमें उनके उत्साह, परिश्रम, मानवीय व्यवहार, सेवा की तासीर और बलिदान भावना का अनुसरण करने की आवश्यकता है।
शाह ने आगे कहा, “गुरु गोविंद सिंह ने मानवता और राष्ट्रीय अखंडता के लिए जो योगदान दिया उसे कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता। आज 350 वर्ष बाद भी गुरुजी के जीवन र्पयत संघर्ष और बलिदान का चित्र भारत में देशभक्त योद्धाओं के लिए चरित्र निर्माण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा, “देश और दुनिया में पंथ स्थापना की विभिन्न कल्पनाएं सामने आई हैं, लेकिन व्यवहार में पंथ परस्पर एकता के सूत्र में कम ही बांध पाए हैं, लेकिन खालसा पंथ में विलक्षण विशिष्टता है कि वह भेदभाव भुलाकर सभी को समादरपूर्वक अपने में समेटने की क्षमता रखता है। मानवतावादी कौम की कल्पना को साकार करता है। यह राष्ट्रीय एकता की अनुपम भेंट है।
शाह ने कहा कि भाजपा की कई प्रांतों में सरकार है। केंद्र में भी भाजपा और साथी दलों की सरकार है। जब दशम गुरु गोविंद सिंह का 350वां प्रकाश उत्सव आया, तब केंद सरकार ने तय किया कि देश के हर कोने-कोने में 350वां प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देशभर में प्रकाश उत्सव मनाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से जुड़े स्थानों व उनके संदेशों को प्रचारित और प्रसारित करने की योजना तैयार की है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये की राशि निश्चित की है।
उन्होंने खालसा परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने संकट के समय ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया। इतिहास गवाह है कि इस नारे को सिखों ने सफलतापूर्वक जीकर देश की सीमाओं की सुरक्षा और अन्न की आत्मनिर्भरता के रूप में प्रमाणित किया है।”
वहीं, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मौके पर वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों का जिक्र किया और कहा, “1984 की दुखद घटनाएं अब भी मन को कचोटती हैं।”
उन्होंने कहा, “हमें 1984 की दुखद घटनाएं याद हैं, जो मन को कचोटती हैं। मध्यप्रदेश में उन घटनाओं के पीड़ित और परिवार हमारी श्रद्धा और सहानुभूति का पात्र रहेगा, उसे हर संभव सहायता देना हमारा कर्तव्य है।”
शिवराज ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह ने तत्कालीन मुगलों के अत्याचारों का बहादुरी के साथ विरोध किया और न्याय, नैतिकता के लिए जीवनर्पयत संघर्ष करते हुए प्राणों का बलिदान किया। उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा भावना, देशप्रेम, मानवसेवा और देश की एकता, अखंडता अभिनंदनीय है।”
उन्होंने आगे कहा कि सिखों की आस्था के जो केंद्र-स्थल हैं, उन्हें राज्य की मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के अंतर्गत जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और जो जिज्ञासु इन तीर्थस्थलों में पहुंचना चाहेंगे, उसके लिए व्यवस्था की जाएगी।
इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान भी उपस्थित थे।
इससे पहले अमित शाह विमान से जबलपुर पहुंचे, डुमना हवाईअड्डे पर शाह का मुख्यमंत्री शिवराज सहित भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। शाह विमान तल से विश्राम गृह पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा नेताओं से मुलाकात की। उसके बाद विमान से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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