बीएसएफ ने जवानों को खराब भोजन परोसने से इनकार किया

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने मंगलवार को कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सीमा पर उसके जवानों को खराब गुणवत्ता के भोजन परोसे जा रहे हैं।

बीएसएफ के महानिरीक्षक डी.के.उपाध्याय ने कहा कि एक वीडियो में जवान द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच उप महानिरीक्षक ने की है और आरोप के पक्ष में कुछ भी नहीं मिल सका है। यह वीडियो जम्मू एवं कश्मीर सीमा से वायरल हुआ था।

उपाध्याय ने कहा, “उप महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी वहां गए और बीएसएफ जवानों को परोसे गए भोजन की गुणवत्ता के बारे में पूछताछ की। प्रथमदृष्टया, अन्य जवानों ने कोई शिकायत नहीं की।”

यह बयान बीएसएफ के जवान तेजबहादुर यादव द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो के वायरल होने के एक दिन बाद आया है। इस वीडियो के बाद बीएसएफ ने इसकी जांच कराई।

वीडियो में यादव प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कह रहे हैं कि ठंडे, पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों की दशा दयनीय है।

यादव ने आरोप लगाया कि जवानों को खराब गुणवत्ता के भोजन परोसे जा रहे हैं और कभी-कभी उन्हें भूखे रहने को मजबूर होना पड़ता है।

खुद को बीएसएफ की 29 बटालियन का बताने वाले यादव ने किसी का नाम लिए बगैर अधिकारियों पर जवानों के लिए आए भोज्य पदार्थो को अवैध रूप से बेचने का आरोप लगाया।

यादव ने एक और वीडियो पोस्ट किया जिसमें खराब ढंग से सेंकी गई एक गई रोटी और दाल दिख रही है। इसके बारे में उन्होंने कहा कि इस दाल में नमक और हल्दी के अलावा और कुछ नहीं है।

आरोपों को आधारहीन बताते हुए उपाध्याय ने कहा कि बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों को समान गुणवत्ता के भोजन परोसे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि अन्य लोगों के अलावा रसोइये से भी पूछताछ की जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि इससे पहले यादव अवज्ञा के आरोपी रह चुके हैं और एक अधिकारी पर बंदूक तानने के आरोप में साल 2010 में उन्होंने कोर्ट मार्शल का भी सामना किया था।

उपाध्याय ने कहा, “उनके परिवार और बच्चों की स्थिति पर विचार करते हुए बल ने उदारवादी रुख अपनाया था। बर्खास्त किए जाने के बावजूद यादव की सेवा सिर्फ 89 दिनों के कठोर कारावास के बाद बहाल कर दी गई थी।”

महानिरीक्षक ने कहा, “तब से उन्हें मुख्यालय में रखा गया था, ताकि वह निगरानी में काम कर सकें और इस तरह का काम दोबारा नहीं कर सकें।”

उपाध्याय ने कहा, “उन्होंने 31 जनवरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए एक पत्र प्रस्तुत किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। सीमा चौकी पर उन्हें 15 दिसंबर को भेजा गया था। कुछ जवान छुट्टी पर थे, इसलिए 15 दिनों पहले उन्हें वहां भेजा गया था।”

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को वीडियो को लेकर गृह सचिव को बीएसएफ से रपट मांगने का आदेश दिया था।

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