भारी बर्फबारी से निपटने को जूझ रहा शिमला

शिमला, 13 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही शिमला में हाल के वर्षो में भारी हिमपात लगभग दूर हो चला था। इस कारण प्रशासन ब्रिटिश काल से जिस बर्फ नियमावली का अनुसरण करता रहा है, वह ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी। इस बीच गत 7-8 जनवरी को अचानक 83 सेंटीमीटर बर्फबारी हो गई।

शिमला, 13 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही शिमला में हाल के वर्षो में भारी हिमपात लगभग दूर हो चला था। इस कारण प्रशासन ब्रिटिश काल से जिस बर्फ नियमावली का अनुसरण करता रहा है, वह ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी। इस बीच गत 7-8 जनवरी को अचानक 83 सेंटीमीटर बर्फबारी हो गई।

बर्फबारी के विनाशकारी परिणामों से निपटने में प्रशासन की विफलता ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है और स्थानीय स्तर पर असंतोष उत्पन्न हो गया है। राज्य के अधिकारी तेजी से ज्ञान की बातें पुस्तिका में खंगाल रहे हैं।

80 वर्षीय स्थानीय निवासी रमेश सूद ने कहा, “शिमला के अधिकांश इलाकों में सात जनवरी को बाधित हुई बिजली और पानी की आपूर्ति को फिर से बहाल करने की अक्षमता स्पष्ट रूप से सरकार की विफलता दर्शाती है।”

मुख्यमंत्री निवास के निकट स्टोक्स पैलेस में सूद के घर में बाधित हुई बिजली आपूर्ति पांच दिनों बाद 11 जनवरी को ही बहाल हो पाई, लेकिन आपूर्ति अनियमित है। उन्होंने आगे कहा, “यह बर्फबारी सचेत करने वाली है।”

अधिकारी विद्युत आपूर्ति बाधित होने का दोष बर्फ से लदे वृक्षों के उखड़ने पर मढ़ते हैं, जिससे नजदीक के बिजली के खंभे, तार और ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गए।

मुख्य सचिव वी.सी.फारका ने आईएएनएस से कहा कि 12 जनवरी तक 80 प्रतिशत घरों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है और अन्य इलाकों में भी यथाशीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

सप्ताहांत में अधिक बर्फबारी होने के संबंध में स्थानीय मौसम कार्यालय द्वारा जारी परामर्श के मद्देनजर उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें आम लोगों को कोई असुविधा नहीं होने के लिए पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है।

शिमला बर्फ नियमावली में बर्फबारी के दौरान प्रशासन के दायित्व और कर्तव्य जैसे नियंत्रण कक्ष स्थापित करना, सड़कों और पगडंडियों की सफाई के लिए लोगों और मशीनरी की तैनाती के साथ-साथ बिजली और पानी की आपूर्ति बनाए रखना आदि सूचीबद्ध हैं।

हर साल ठंड शुरू होने से पहले जिला प्रशासन उपायों की समीक्षा के लिए एक बैठक करता है और भारी बर्फबारी के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए दायित्व सौंपता है।

अधिकारी मानते हैं कि विगत कई दशकों से यह बैठक महज एक औपचारिकता बन गई है। इसे बर्फ का मार्गदर्शन बैठक कहा जाता है।

ब्रिटिशों द्वारा बनाई गई बर्फ नियमावली के अनुसरण की बात कबूल करते हुए उप महापौर टिकेंदर पंवार ने आईएएनएस से कहा कि इसकी समीक्षा की जरूरत है।

लोक सेवा बहाल करने में हो रही असामान्य देरी से विचलित भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक और नेता सुरेश भरद्वाज ने कहा, “अगर भारी बर्फबारी से निपटने में सरकार असहाय महसूस करती है तो सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए वह भारतीय सेना को बुलाए।”

राज्य के प्रमुख अस्पताल, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की ओर जाने वाली सड़क यातायात और पदयात्रियों के लिए अब भी फिसलन भरी है।

शिमला में मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने आईएएनएस से कहा कि सात से आठ जनवरी तक हुई 83 सेंटीमीटर बर्फबारी अब तक की सर्वाधिक बर्फबारी है।

मौसम विभाग के रिकार्ड के अनुसार, 12 फरवरी, 2007 को शिमला में 62 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी, जो एक दिन में 99 वर्षो में सबसे ज्यादा थी।

साल 2005 में जनवरी महीने में 94.3 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी, लेकिन वह सात दिनों के दौरान हुई थी। साल 2004 में पूरे जनवरी महीने में 96.6 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी।

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