कोलकाता, 17 जनवरी (आईएएनएस)। प्रख्यात गणितज्ञ एम. एस. रघुनाथन ने कहा है कि भारत में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों का ‘प्रदर्शन अच्छा नहीं है’ तथा स्कूली शिक्षा प्रणाली की हालत ‘भयावह’ है। इनमें आपात सुधार की जरूरत है।
प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी की 200वीं वर्षगांठ के मौके पर एक व्याख्यान में रघुनाथन ने कहा, “कुल मिलाकर हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अच्छा (प्रदर्शन) नहीं कर रहे हैं। दिक्कत यह है कि हम तेजी से संस्थानों की संख्या बढ़ाने में लगे हैं, जबकि इन्हें चलाने वाले लोग योग्य नहीं हैं।”
उन्होंने कहा, “स्कूलों की हालत भयावह है, खासकर वैसे स्कूल जहां गरीब तबके के बच्चे पढ़ने जाते हैं। स्कूली शिक्षा में तत्काल सुधार की जरूरत है।”
रघुनाथन ने कहा, “एक बार जब आपके पास उच्च गुणवत्ता वाले लोग नहीं होते हैं, तो हालत बिगड़नी शुरू हो जाती है और यही हुआ है। ऐसे लोगों की भर्ती के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, वे खुद गुणवत्तापूर्ण नहीं होते।”
इस बात का उल्लेख करते हुए कि स्वतंत्रता से पहले जो शिक्षण संस्थान अस्तित्व में आए, उन्होंने अन्य की तुलना में अपनी गुणवत्ता अपेक्षाकृत बरकरार रखी है, उन्होंने कहा कि शिक्षकों (फैकल्टी) की भर्ती संतोषजनक नहीं है।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक व प्रशासनिक संगठनों के हस्तक्षेप के कारण भी उच्चस्तरीय मानदंड बनाए रखना कठिन काम हो गया है। अगर आप आजादी से पहले अस्तित्व में आए कॉलेजों को देखें, तो उनकी हालत आपको आजादी के बाद अस्तित्व में आए कॉलेजों से बेहतर लगेगी।”
उन्होंने कहा कि गणित के क्षेत्र में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च तथा इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बेहद शानदार प्रदर्शन कर रहा है, जबकि अन्य का प्रदर्शन निराशानजक है।”
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