उत्सव के रंग में डूबे ‘नर्मदा’ के तटीय गांव (फोटो सहित)

भोपाल, 17 जनवरी (आईएएनएस)। नर्मदा नदी के किनारे के गांव का नजारा मनभावना है, घरों के बाहर रंगोली सजाई गई है, तो केले के पत्तों से वंदनवार लगाए गए हैं, महिलाएं कलश लिए गांव के प्रवेश द्वार पर खड़ी है और बैंडबाजों की धुन पर आम लोगों से लेकर घोड़े भी थिरक रहे हैं। यह सब हो रहा है नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त कर प्रवाहमान बनाने के लिए निकल रही ‘नमामि देवी नर्मदे’ सेवायात्रा के स्वागत के दौरान।

भोपाल, 17 जनवरी (आईएएनएस)। नर्मदा नदी के किनारे के गांव का नजारा मनभावना है, घरों के बाहर रंगोली सजाई गई है, तो केले के पत्तों से वंदनवार लगाए गए हैं, महिलाएं कलश लिए गांव के प्रवेश द्वार पर खड़ी है और बैंडबाजों की धुन पर आम लोगों से लेकर घोड़े भी थिरक रहे हैं। यह सब हो रहा है नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त कर प्रवाहमान बनाने के लिए निकल रही ‘नमामि देवी नर्मदे’ सेवायात्रा के स्वागत के दौरान।

राज्य सरकार ने नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अमरकंटक से 11 दिसंबर को 144 दिन की सेवायात्रा शुरू की है। यह यात्रा लगभग 11 सौ गांवों से होकर गुजरेगी और 3,350 किलोमीटर का रास्ता तय करेगी। इस यात्रा का समापन 11 मई, 2017 को अमरकंटक में ही होगा। यात्रा के दौरान जगह-जगह गोष्ठी, जनसंवाद, परिचर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

होशंगाबाद जिले के खोजनपुर गांव का नजारा मंगलवार को कुछ ऐसा था, जैसे यहां कोई बारात आने वाली हो। गांव की सड़कें साफ-सुथरी, घरों के बाहर रंगोली सजी, गांव के लोग सजधजकर तैयार हुए, जगह-जगह ध्वज लगे, वंदनवारे लगाए गए और ढोल बजे। महिलाएं कलश लिए खड़ी थीं। यह सब हो रहा था नर्मदा सेवायात्रा के स्वागत के लिए।

गांव की थुली बाई (60) नर्मदा को अपना जीवन बताती हैं। उनका कहना है, “यह ऐसी नदी है जो हमारे जीवन को खुशहाल बनाती है, हम हैं तो उसका श्रेय नर्मदा मैया को है। आज गांव में नर्मदा यात्रा आई है और उसके स्वागत के लिए गांव के लोगों ने यह साज-सज्जा की है।”

सुनीता सोलंकी (35) का मायका है यह गांव। वह बताती हैं, “मेरा जीवन ही नर्मदा पर निर्भर है, मेरी शादी भोपाल में हुई है, मगर मैं अपनी हर मनौती के लिए नर्मदा के तट पर जाती हूं। नर्मदा की कृपा से ही हमारा जीवन सुखमय है।”

इस यात्रा का डोंगरवाड़ा और हासलपुर में भी जोरदार स्वागत हुआ। हासलपुर में गूंजती ढोल की थाप, आकर्षक तौर पर सजाए गए घोड़े और सिर पर कलश रखे महिलाएं नर्मदा नदी के प्रति आमजन की आस्था बयां कर गईं। यहां बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग नर्मदा के जयकारे लगाकर अपनी आस्था और विश्वास को जाहिर कर गए।

यात्रा का नेतृत्व कर रहे भाजपा के प्रदेश महामंत्री विष्णु दत्त शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “यह कोई राजनीतिक यात्रा नहीं है, यही कारण है कि इस यात्रा को हर वर्ग, समाज और दल का भरपूर समर्थन व सहयोग मिल रहा है। इसे नर्मदा नदी के किनारे के गांव में आकर ही समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही ऐलान कर चुके हैं, इस यात्रा में जनता आगे और सरकार पीछे है।”

नर्मदा सेवा यात्रा जिस गांव में पहुंचती है, वहां लोगों को नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प दिलाया जाता है, पौधे रोपे जाते हैं और इन पौधों की देखरेख करने की बात गांव वाले दोहराते हैं।

नर्मदा नदी आम लोगों की आस्था का केंद्र है, यही कारण है कि सेवा यात्रा को भरपूर जनसमर्थन मिल रहा है, सरकार ने जिन उद्देश्यों को लेकर यह यात्रा शुरू की है और वास्तव में उसे बरकरार रखा गया तो नर्मदा की स्थिति बदलेगी, इसमें संदेह नहीं। मगर लोगों को संशय यह भी है कि कहीं सरकार यात्रा पूरी होने के बाद अपने वादे ही न भूल जाए।

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