‘फरवरी से शुरू हो सकती हैं क्षेत्रीय उड़ानें’ (लीड-1)

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि उसकी महत्वाकांक्षी क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) ‘उड़ान’ के तहत पहली उड़ान अगले महीने शुरू हो सकती है। इससे दूरदराज के इलाकों में विमान सेवा मुहैया कराई जाएगी। लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा के लिए यात्रियों से प्रति घंटे 2,500 रुपये वसूले जाएंगे।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने यहां कहा, “पहले आरसीएस उड़ान का संचालन फरवरी के अंत में या मार्च की शुरुआत में होने की संभावना है। हमें आसीएस पर संचालकों से बेहद उत्साहित प्रतिक्रिया मिली है।”

मंत्री ने कहा, “आरसीएस के तहत पहले चरण की बोली में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को 190 आरसीएस मार्गो पर 11 एयरलाइनों की ओर से 43 प्रारंभिक प्रस्ताव मिले।”

उन्होंने कहा, “प्रारंभिक प्रस्ताव के मुकाबले और बेहतर काउंटर प्रस्ताव मांगे गए हैं।”

मंत्री के मुताबिक, आरसीएस के तहत क्षेत्रीय हवाई मार्गो के लिए अंतिम बोली तीन फरवरी तक लगेगी।

मंत्री ने इस ओर ध्यान दिलाया कि यह योजना भारतीय विमानन क्षेत्र की दशा व दिशा पूरी तरह बदलने वाली साबित होगी, क्योंकि इससे न केवल हवाईअड्डों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि एयरलाइनों की संख्या में भी इजाफा होगा।

सिन्हा ने कहा, “वर्तमान में हमारे देश में 75 ऑपरेशनल हवाईअड्डे हैं। प्रारंभिक बोली के आधार पर ऑपरेशनल हवाईअड्डों की संख्या 118 हो जाएगी।”

उन्होंने कहा, “योजना से निर्धारित उड़ानों की संख्या भी बढ़ेगी। 11 बोलीदाताओं में से कुछ पहली बार उड़ान सेवा शुरू करेंगे।”

इन प्रारंभिक प्रस्तावों के लिए काउंटर बोली लगाने के लिए प्रतिवेदन सौंपने की अंतिम तिथि एक फरवरी है।

काउंटर प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद आरसीएस मार्ग उन एयरलाइनों को आवंटित किए जाएंगे, जो सबसे कम सरकारी सहायता (वायबिलिटी गैप फंडिंग-वीजीएफ) पर उड़ाने भरने को तैयार होंगी।

उल्लेखनीय है कि बीते साल सरकार ने आरसीएस शुरू किया था, जो राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (एनसीएपी) का मुख्य घटक है। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय सहयोग तथा अवसंरचना का विकास कर क्षेत्रीय संपर्को को बढ़ाना है।

आरसीएस के उद्देश्य का नामकरण उड़ान (उड़े देश के आम नागरिक) रखा गया है, जो क्षेत्रीय मार्गो पर मांग बढ़ाकर देश के हवाई यातायात में इजाफा करेंगे।

उड़ान योजना 10 साल तक लागू रहेगी।

इस योजना का उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में तथा जहां विमान सेवा सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सेवा मुहैया कराना है। लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा के लिए यात्रियों से प्रतिघंटे 2,500 रुपये वसूले जाएंगे।

आरसीएस के तहत एयरलाइनों को केंद्र सरकार कम उत्पाद कर व सेवा कर के रूप में छूट प्रदान कर सकती है, वहीं राज्य सरकार विमानों के लिए एटीएफ पर लगने वाले मूल्य संवर्धित कर (वैट) को एक फीसदी या उससे भी कम करेगी।

इसके अलावा, राज्य सरकार सुरक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लेगी तथा अग्निशमन सेवा, बिजली, पानी तथा अन्य जरूरतें रियायती दरों पर मुहैया कराएगी।

वहीं, हवाईअड्डा संचालक लैंडिंग व पार्किं ग चार्ज, टर्मिनल नेविगेश लैंडिंग फीस नहीं वसूलेंगे तथा रूट नेविगेशन फैसिलिटी शुल्क पर भी छूट देंगे।

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