पटना, 19 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार सरकार की मद्य निषेध नीति के समर्थन में स्कूली बच्चों को एक प्रस्तावित मानव श्रृंखला में जबरदस्ती शामिल करने पर चिंता जताते हुए पटना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को बिहार के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शुक्रवार को न्यायालय के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
मामले में राज्य के प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर द्वारा दाखिल जवाब से असंतोष जताते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एक खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
न्यायालय मामले की सुनवाई शुक्रवार (20 जनवरी)को करेगा, जबकि मानव श्रृंखला कार्यक्रम का आयोजन 21 जनवरी को होना है।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘फोरम फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन’ द्वारा दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने मामले पर बिहार सरकार का जवाब मांगा था।
बिहार सरकार की योजना राज्य की मद्य निषेध नीति के समर्थन में 21 जनवरी को दुनिया की सबसे बड़ी (11,000 किलोमीटर से अधिक) मानव श्रृंखला बनाने की है।
न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि उसने किस कानून के तहत राष्ट्रीय राजमार्गो तथा राज्य राजमार्गो पर यातायात को बंद करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी स्कूलों से बच्चों को 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव श्रृंखला में शामिल करने को कहा है तथा सुबह नौ बजे से लेकर अपराह्न तीन बजे तक यातायात बंद रखने का आदेश दिया है।
अधिकारियों ने कहा कि मानव श्रृंखला की तस्वीर लेने के लिए तीन उपग्रहों, चार विमानों, दो हेलीकॉप्टरों तथा 40 ड्रोनों का इस्तेमाल किया जाएगा। तीन उपग्रहों में एक विदेशी तथा दो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्यभर में अपराह्न 12.15 बजे से अपराह्न एक बजे तक दो करोड़ लोग मानव श्रृंखला बनाने के लिए हाथ से हाथ मिलाएंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच अप्रैल, 2016 को राज्य में शराब पर पाबंदी लगा दी थी। तब से लेकर अब तक बिहार में शराब का सेवन करने तथा उसे ले जाने के आरोप में 16,000 से अधिक लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
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