डॉ. दुबे रविवार को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पांचवें प्रांतीय सम्मेलन की जानकारी देने के लिए रायपुर के प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
पद्मश्री दुबे वर्तमान में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में सचिव हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का पांचवां प्रांतीय सम्मेलन 28 व 29 जनवरी को राजिम के पं. राम विशाल पांडेय शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने प्रेसवार्ता में बताया कि छत्तीसगढ़ी को संविधान की 8वीं सूची में शामिल करने, छत्तीसगढ़ी को पाठ्यक्रम में शुरू करने व लोक व्यवहार में छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने के संबंध में जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहली से पांचवीं तक छत्तीसगढ़ी को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक विषय शिक्षा के रुप में शुरू करने की निरंतर मांग की जा रही है। हिंदी व अंग्रेजी के साथ छत्तीसगढ़ी का उपयोग भी 75 प्रतिशत होना चाहिए।
डॉ. पाठक ने बताया कि पवन दीवान का 60-70 के दशक में छतीसगढ़ी में प्रमुख योगदान रहा है। पवन दीवान पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने लाल किला में कविता पाठ की थी। उन्होंने कहा, “सरकार से हमारी मांग है, कि पवन दीवान के नाम से एक शोधपीठ का गठन किया जाए, ताकि भविष्य में भी लोग उनको प्राथमिकता से जान सके।” उनका कहना है कि पवन दीवान शोधपीठ राजिम में अलग से बने। उसे किसी विश्वविद्यालय में शुरू न किया जाए।
डॉ. दुबे ने बताया कि सांसद अभिषेक सिंह ने शून्यकाल में छत्तीसगढ़ी राजभाषा को 8वीं सूची में शामिल करने के लिए संसद में प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन सत्र नहीं चल पाने के कारण सूची पारित नहीं हो पाई।
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