नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। यहां गुरुवार को आयोजित गणतंत्र दिवस की परेड में हिमाचल प्रदेश की झाकी में प्राचीन कला की छठा बिखेरी गई।
परेड में तीन साल बाद शामिल की गई हिमाचल की झांकी में एक महिला की मूर्ति चंबा ‘रूमाल’ पर कढ़ाई करती दिखाई दी।
झांकी के पीछे के हिस्से में चंबा शहर के बड़े मिलेनियम गेट को भी सजाया गया। इसके अलावा लोकनृत्य ‘रासलीला’ भी प्रदर्शित की गई।
रूमाल पर कढ़ाई की परंपरा 16वीं-17वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। हाथ से कढ़ाई किया रूमाल जन्मदिन, शादी और त्योहारों जैसे विशेष अवसरों पर तोहफे के तौर पर दिया जाता था। यह परंपरा मुख्य रूप से शाही परिवारों के बीच प्रचलित थी।
शादी में दूल्हा और दुल्हन के माता-पिता के बीच ऐसे रूमालों का आदान-प्रदान किया जाता था।
भाषा, कला और संस्कृति के विदेश विभाग के अनुसार, सबसे पुराना रूमाल 16वीं शताब्दी का है। फिलहाल यह पंजाब के होशियारपुर शहर में एक सिख मंदिर में रखा है।
माना जाता है कि यह बेबे नानकी गुरु नानक की बहन द्वारा बुना गया था।
उल्लेखनीय है कि हाथ की कढ़ाई वाला रूमाल लंदन में विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय में भी रखा गया है। इसमें कुरुक्षेत्र के युद्ध का चित्रण है।
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