पटना, 10 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 11 दिवसीय पटना पुस्तक मेले के सातवें दिन शुक्रवार को ‘कविता की राह कहानी’ विषय पर परिचर्चा हुई। साथ ही स्कूली बच्चों ने निबंध-कला में अपनी दक्षता दिखाई।
सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) द्वारा आयोजित 23वें पटना पुस्तक मेले के मुख्य मंच ‘भोजपुरी मुक्ताकश मंच’ पर ‘कविता की राह कहानी’ पर परिचर्चा में भाग लेते हुए प्रसिद्ध कथाकार उदय प्रकाश ने आज के समय को ‘जुमलों’ का समय बताते हुए कहा, “जब समाज पर संकट आता है, तब सबसे पहले दर्शन और कविता पर हमला होता है। दरअसल, जो अच्छी कविता लिख रहा होता है, वह अच्छा गद्य लिख रहा होता है। ऐसी ही बात गद्य के लिए भी कही जा सकती है।”
कथाकार वंदना राग ने कहा कि आज साहित्य के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत अपने घर में बच्चों की शिक्षा से ही शुरू होती है। उन्होंने कहा कि सही अर्थो में साहित्य के अवसान के लिए समाज जिम्मेवार है। बच्चों को साहित्य का महत्व न समझाकर केवल तकनीकी ज्ञान पर जोर दिया जाता है, जबकि सभ्य मानव के लिए दोनों जरूरी है।
परिचर्चा में भाग लेते हुए कथाकार हृषिकेश सुलभ ने कहा कि साहित्य मानवीय गरिमा की रक्षा करने वाला प्रतिपक्ष है। उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक कारण कविता और कहानी में फांक पैदा नहीं कर सकता।
मेले में ज्ञान-विज्ञान समिति द्वारा ‘असर’ विषय पर भी परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें बिहार के विद्यालयों की स्थिति और पठन-पाठन पर चर्चा केंद्रित रही। परिचर्चा में भाग लेते हुए शिक्षाविद् गालिब ने कहा कि आज शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है, जो चिंताजनक है।
डॉ़ फैयाज ने कहा, “आज की स्थ्िित में सुधार केवल शिक्षकों पर दोष मढ़ने से नहीं होगा।”
वहीं, प्रोफेसर विनय कंठ ने कहा कि शिक्षा को बाजार के हवाले करना खतरनाक है। शिक्षा में निहित गुणवत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून को सरकार को पूरा करना चाहिए।
इस पुस्तक मेले में बच्चों पर खास फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम में स्कूली बच्चों के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘मसि’ संस्था द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में पटना के विभिन्न स्कूलों से आए करीब 25 बच्चों ने शिरकत की।
इस प्रतियोगिता में आठवीं कक्षा से नीचे की कक्षाओं के बच्चों के लिए ‘मेरा लक्ष्य’ विषय दिया गया, जबकि आठवीं कक्षा से ऊपर के बच्चों को ‘विज्ञापन में प्रतिबिंबित मां’ विषय पर निबंध लिखने को दिया गया। इस प्रतियोगिता का परिणाम 12 फरवरी को प्रकाशित किया जाएगा।
पुस्तक मेले में शुक्रवार को अर्पण कुमार के उपन्यास ’25 वर्ग गज’ का लोकर्पण किया गया। इस कार्यक्रम में भाग लेते हुए साहित्यकार अवधेश प्रीत ने बताया कि अर्पण कुमार का यह उपन्यास आज के समय की पड़ताल करता है। इसमें बिहार के गांव से लेकर दिल्ली तक की पूरी कहानी है।
इस मौके पर शिवदयाल ने बताया कि इस कहानी में छूटता दांपत्य, बिखरते युवा स्वप्न के साथ ही महानगर की तंगहाल जिंदगी को दिखाया गया है।
उल्लेखनीय है कि यह मेला चार फरवरी को शुरू हुआ, जो 14 फरवरी तक चलेगा।
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