नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। शहरी विकास पर मंगलवार को यहां राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई है, जिसमें पांच प्रमुख सुधारों पर राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू कार्यशाला की अध्यक्षता करेंगे। शहरी विकास मंत्रालय ने शहरी शासन संचालन, नियोजन तथा वित्तीय कायाकल्प के उद्देश्य से सुधार का नया प्रारूप विकसित किया है, ताकि राज्य और शहरी निकाय अगले तीन वर्षो में सुधार कार्य लागू करने में छोटे कदम उठाने की वर्तमान गति से आगे बढ़कर बड़े कदम उठा सकें।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, शहरी क्षेत्र के बारे में सचिवों के समूह ने सिफारिश की है कि शहरों के संचालन, नियोजन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार कार्यक्रम के लिए छोटे कदम उठाने के बजाय बड़े कदम उठाने का समय आ गया है।
बयान के अनुसार, सचिवों के समूह ने निवेश बैंक गोल्डमैन सैश की रपट का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठता की जगह मेधा पर आधारित नौकरशाही देश के प्रति व्यक्ति जीडीपी विकास में वार्षिक रूप से प्रतिशत अंक जोड़ सकती है। समूह ने शहरी निकायों में योग्यता संपन्न तकनीकी स्टाफ तथा प्रबंधकीय लोगों की कमी से नवाचार में बाधा आ रही है। समूह ने शहरी निकायों में पेशेवर लोगों को शामिल करने की सिफारिश करते हुए कहा कि बाद में प्रवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और शहरों में आयुक्तों तथा वित्त और राजस्व के उच्च पदों पर भर्ती प्रतियोगिता की माध्यम से की जानी चाहिए।
बयान में कहा गया है कि पांच प्रमुख सुधारों को लागू करने में प्रोत्साहन देने के लिए मंत्रालय ने 2017-18 के दौरान सुधार प्रोत्साहन कोष की राशि 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर प्रतिवर्ष 3000 करोड़ रुपये अगले तीन वर्षों के लिए की है। 2016-17 में अमृत दिशा-निर्देश में इंगित सुधारों को लागू करने के लिए 400 करोड़ रुपये दिए गए।
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