भुवनेश्वर, 1 मार्च (आईएएनएस)। ओडिशा विधानसभा में बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस सदस्यों ने राज्य में किसानों की आत्महत्या और सब्जियों की बिक्री के संकट को लेकर शोरशराबा किया।
विपक्षी दलों के विरोध और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष निरंजन पुजारी को दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
शून्य काल में विपक्ष के नेता नरसिंह मिश्रा ने किसानों की मौत और सब्जियों की बिक्री के संकट के लिए नवीन पटनायक सरकार के ‘उदासीन और लचर रवैये’ को दोषी ठहराया।
मिश्रा ने कहा, “किसान भारी मात्रा में सब्जियां उगा रहे हैं, लेकिन उसे बेचने के लिए बाजार नहीं है। इसलिए उन्हें इसे सड़कों पर फेंकना पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकार ने उनके लिए शीत भंडारण सुविधा भी नहीं उपलब्ध कराई है।”
मिश्रा ने सब्जियों की बिक्री न हो पाने के लिए नोटबंदी के फैसले को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ही 2016 में बारगढ़ जिले में गए थे, जब किसानों की मौत की खबर आई थी, लेकिन किसानों के लिए कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। 2017 में भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।”
इसके तुरंत बाद ही कांग्रेस के मुख्य सचेतक तारा प्रसाद बाहिनीपति के नेतृत्व में पार्टी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक प्रदीप पुरोहित ने मीडिया को बताया कि सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) और विपक्षी कांग्रेस के बीच सांठगांठ हो गई है और वे साथ मिलकर सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाल रहे हैं।
बारगढ़ जिले में किसान की आत्महत्या को लेकर बीजद विधायक सुशांत सिंह ने कहा, “यह घटना मेरे निर्वाचन क्षेत्र में घटी है। राज्य सरकार इसके कारण का पता लगा रही है।”
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